बीजेपी की महिला कार्यकर्ता के साथ बदसलूकी मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान, कर्नाटक डीजीपी को लिखा पत्र
नई दिल्ली। कर्नाटक के हुबली में बीते दिनों बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता को गिरफ्तार करते हुए पुलिस के द्वारा उसके साथ की गई कथित बदसलूकी मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें महिला को पुलिसकर्मियों द्वारा प्रताड़ित किया गया और गिरफ्तारी के दौरान उसके कपड़े फाड़े गए। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कर्नाटक के डीपीजी एम.ए. सलीम को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यह महिलाओं की गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लैंगिक हिंसा से सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कर्नाटक के डीजीपी को पत्र भेजकर कहा है कि इस मामले एफआईआर (यदि पहले से दर्ज न हो) दर्ज की जाए। साथ ही वीडियो साक्ष्य की जांच सहित निष्पक्ष, तटस्थ और समयबद्ध जांच करने का भी निर्देश दिया है। आरोप साबित होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के साथ पीड़िता को कानून के अनुसार चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक सहायता, पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने 5 दिनों में इस पूरे मामले की विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
वहीं कर्नाटक बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्नाटक में राज्य महिला आयोग ने पीड़िता के साथ खड़े होने के बजाय पुलिस का बचाव किया। यह चिंताजनक प्रतिक्रिया राज्य में दलित महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करने के अपने संवैधानिक और नैतिक दायित्व के प्रति प्रदेश की कांग्रेस सरकार की पूर्ण विफलता को उजागर करती है। जब महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए गठित संस्थाएं कांग्रेस पार्टी कार्यालय के विस्तार के रूप में कार्य करती हैं, तो जवाबदेही समाप्त हो जाती है और जनता का विश्वास अपूरणीय रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है। वैधानिक निकायों का ऐसा राजनीतिकरण केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह स्वयं न्याय के साथ घोर विश्वासघात है।
