June 1, 2026

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सोनिया गांधी ने कोर्ट में दाखिल किया जवाब, नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़ा है मामला

नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने बिना नागरिकता के वोटर लिस्ट में नाम आने के आरोप संबंधी याचिका पर कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जवाब दिया है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में वकील विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटिशन यानी पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। वकील विकास त्रिपाठी ने इस मामले में पहले एक याचिका दाखिल की थी। जिसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में खारिज कर दिया था। याचिका में अपील की गई है कि बिना नागरिकता वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर केस दर्ज किया जाए। अब इस मामले में 21 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई होगी।

विकास त्रिपाठी ने रिवीजन याचिका में दावा किया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता ली, लेकिन उनका नाम उससे पहले ही नई दिल्ली लोकसभा सीट की 1980 की वोटर लिस्ट में चढ़ गया था। याचिका में कहा गया है कि जब सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं, तो उनका नाम आखिर नई दिल्ली सीट की वोटर लिस्ट में कैसे चढ़ गया? याचिका में ये दावा भी किया गया है कि साल 1982 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया। इस पर भी सवाल उठा है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया? याचिका में ये भी पूछा गया है कि सोनिया गांधी ने जब 1983 में भारत की नागरिकता ली, तो किन दस्तावेजों के आधार पर 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम चढ़ाया गया? क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया?

अब 21 फरवरी को नागरिकता और वोटर लिस्ट के मामले में सोनिया गांधी की ओर से दाखिल जवाब पर कोर्ट फैसला लेगा कि उनके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है या नहीं। सोनिया गांधी को इससे पहले नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी बनाया जा चुका है। उस मामले में बीते दिनों ट्रायल कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी एजेंसी ने नेशनल हेराल्ड मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की थी। जिस कारण ईडी केस नहीं चला सकती। वहीं, कोर्ट के इस फैसले से पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने नेशनल हेराल्ड केस में एक एफआईआर दर्ज की थी। अगर कोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया, तो इससे कांग्रेस की वयोवृद्ध नेता सोनिया गांधी के लिए नई मुश्किल खड़ी होने के साथ ही एक बार फिर सियासत गर्मा सकती है।

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