February 21, 2026

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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को गैरकानूनी बताया, डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका; जानिए इसका असर

वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जोरदार झटका दिया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के अन्य देशों के सामान पर लगाए रेसिप्रोक्ल टैरिफ को गैरकानूनी बताया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से शुक्रवार को टैरिफ पर फैसला सुनाया। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी पावर के इस्तेमाल को खारिज कर दिया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप प्रशासन को अन्य देशों पर लगे रेसिप्रोकल टैरिफ से मिली 175 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि वापस लौटानी पड़ सकती है। हालांकि, ट्रंप अपने विशेष अधिकारों के तहत फिर से टैरिफ भी लगा सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में अलग-अलग देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे। ट्रंप ने कहा था कि अब तक सभी देश अमेरिका का नुकसान कराते रहे हैं। ट्रंप ने कहा था कि अन्य देशों पर अमेरिका टैरिफ नहीं लगाता। जबकि, वे अपने यहां अमेरिका के सामान पर टैरिफ लगाते हैं। ट्रंप ने चीन पर सबसे ज्यादा 34 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया। इसके अलावा पड़ोसी देश कनाडा और मेक्सिको पर भी टैरिफ थोप दिया। ट्रंप ने कहा कि लगातार बढ़ रहा व्यापार घाटा अमेरिका की सुरक्षा और उसकी आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर टैरिफ लगाया था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को उनके देश के 12 राज्यों और इससे प्रभावित होने वाले कारोबारियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रंप के टैरिफ पर पहले अमेरिका के कई राज्यों की निचली अदालतों में सुनवाई हुई थी। निचली अदालतों ने कहा था कि ट्रंप का टैरिफ अमेरिका के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी आईईईपीए से मिली ताकत का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल है। ट्रंप प्रशासन ने इन फैसलों के खिलाफ अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। ट्रंप ने ये तक कहा था कि अगर अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो उससे अमेरिका के लिए संकट पैदा हो सकता है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार टैरिफ मामले में फैसला टाला था। अमेरिका के संविधान के हिसाब से कांग्रेस यानी संसद को ही टैरिफ लगाने का अधिकार है।

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