दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उम्रकैद की सजा, कोर्ट ने मार्शल लॉ लगाने के फैसले को बगावत माना
सियोल। दक्षिण कोरिया के एक कोर्ट ने जबरन मार्शल लॉ लगाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को बगावत करने का दोषी ठहराया। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने यून सुक योल के लिए मौत की सजा की मांग की थी। पूर्व राष्ट्रपति दक्षिण कोरिया की ऊपरी अदालत में फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। अन्य मामलों में पहले ही यून को पांच साल कैद की सजा हो चुकी है। कोर्ट ने दक्षिण कोरिया के पूर्व रक्षा मंत्री को भी 30 साल कैद की सजा सुनाई है। जज जी कुई योन ने को सजा सुनाते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति विद्रोह के दोषी हैं। उन्होंने सेना और पुलिस इकट्ठा कर नेशनल असेंबली पर अवैध कब्जा करने, नेताओं को गिरफ्तार करने और निरंकुश सत्ता स्थापित करने की कोशिश की।
कोर्ट की ओर से सजा सुनाए जाने से पहले विशेष अभियोजक ने दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को मौत की सजा देने की मांग की। अभियोजक ने दलील दी कि मार्शल लॉ लगाने का फैसला लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा था। इस वजह से सबसे सख्त सजा दी जानी चाहिए। इससे पहले जब यून सुक योल को कोर्ट लाया गया, तो उनके समर्थकों ने बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। यून के समर्थकों को संभालने के लिए कोर्ट के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस लगाई गई थी। यून सुक योल ने दिसंबर 2024 में अचानक मार्शल लॉ लागू करने का एलान किया था। उन्होंने सेना और पुलिस से नेताओं को गिरफ्तार करने और संसद पर कब्जा करने के लिए कहा था। हालांकि, यून का दांव उल्टा पड़ गया और वो ही गिरफ्तार कर लिए गए थे।
कोर्ट ने यून के आदेश पर दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लागू कराने की कोशिश करने वाले सेना और पुलिस के अफसरों के साथ ही पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को भी दोषी बताया। किम योग ह्यून को कोर्ट ने 30 साल कैद की सजा सुनाई। किम पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मार्शल लॉ लागू करने की योजना बनाई। साथ ही सेना को सक्रिय करने में भूमिका निभाने के भी किम दोषी पाए गए। पूर्व राष्ट्रपति ने मार्शल लॉ लगाने के फैसले का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि ये कदम देशविरोधी ताकतों को रोकने के लिए जरूरी था। दक्षिण कोरिया में छह घंटे मार्शल लॉ लगा था। फिर सांसदों ने सेना की घेराबंदी तोड़ संसद में प्रवेश किया और इसे खत्म करने के पक्ष में वोट दिया था। इसके बाद 14 दिसंबर 2024 को महाभियोग से यून को राष्ट्रपति पद से हटाया गया था। जुलाई 2025 में यून को गिरफ्तार किया गया था।
