ओम बिरला ने फिर संभाला लोकसभा चलाने का जिम्मा, राहुल गांधी को बोलने न देने के आरोप को बताया गलत
नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खुद पर लगे उन आरोपों को गलत बताया है कि सदन में चर्चा के दौरान वो विपक्ष के सांसदों के माइक बंद कर देते हैं। ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी सांसद अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया था कि लोकसभा स्पीकर उनको बोलने नहीं देते और माइक बंद कर देते हैं। मंगलवार और बुधवार को चर्चा के बाद ध्वनिमत से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया था।
ओम बिरला खुद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद से सदन में नहीं आ रहे थे। अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद गुरुवार को उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही करानी शुरू की। ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने पहले भी साफ किया था कि अध्यक्ष के पास माइक चालू या बंद करने के लिए कोई बटन नहीं होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसद खुद इसे वेरिफाइ कर सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जिस माननीय सांसद को बोलना होता है, सिर्फ उनका ही माइक चालू होता है। ओम बिरला ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना बहुत जरूरी है। उन्होंने इन आरोपों को भी गलत बताया कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोका गया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद के नियम सबसे ऊपर हैं और प्रधानमंत्री समेत कोई भी इन नियमों से ऊपर नहीं।
उन्होंने कहा कि संसद के नियम विरासत में मुझे मिले हैं। जिनका पालन करना बहुत जरूरी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ये सदन 140 करोड़ देशवासियों का प्रतिनिधित्व करता है। यहां हर सांसद अपनी जनता की समस्या और अपेक्षाओं के साथ आता है। ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा ये कोशिश की कि हर सांसद नियमों के तहत बात रखे। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हर उस सांसद को भी बोलने के लिए उन्होंने प्रेरित किया, जो कम बोलते थे। उन्होंने लोकसभा को विचारों का जीवंत मंच बताया और कहा कि बीते दो दिन सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। ओम बिरला ने लोकसभा के सभी सांसदों का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का आसन किसी व्यक्ति का नहीं, लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।
