महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर बरसीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती, सपा पर भी साधा निशाना
नई दिल्ली। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे को को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। मायावती ने कटाक्ष करते हुए कहा कि SC, ST और OBC समाज के संवैधानिक कानूनी अधिकारों आदि के मामले में गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के मामले में जो अब बात कर रही है, तो यही काम उसने केंद्र में अपनी सरकार रहते हुए इसको लेकर कभी पहल क्यों नहीं की है।कांग्रेस ने OBC समाज हेतु मंडल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू नहीं किया, जिसे फिर बीएसपी के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार में अंततः लागू किया गया था, जो सर्वविदित है।
बीएसपी सुप्रीमो बोली, इसी प्रकार यूपी में पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहां बीएसपी की सरकार ने 3 जून 1995 में लागू किया। यही सपा अब अपना रंग बदलकर अपने राजनीतिक स्वार्थ में OBC महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है। अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किन्तु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। इसलिए इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पायेगा।
मायावती ने आगे कहा, जहां तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केंद्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही कदम उठाती। कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में SC, ST और OBC एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है। इसीलिये महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा अर्थात इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। यही सलाह है।
