अमित जोगी की उम्रकैद की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद दी थी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और अब दिवंगत अजित जोगी के बेटे अमित जोगी की सजा पर रोक लगा दी है। अमित जोगी को एनसीपी के कोषाध्यक्ष रहे राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अमित जोगी ने इस सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
राम अवतार जग्गी एनसीपी के कोषाध्यक्ष थे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 2003 में राम अवतार जग्गी की हत्या हुई थी। इस मामले में अमित जोगी समेत 30 आरोपी थे। सीबीआई ने सभी पर आईपीसी की धारा 302 और साजिश रचने की धारा 120-बी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल कोर्ट ने 31 मई 2007 को जग्गी हत्याकांड में 28 लोगों को सजा सुनाई थी, लेकिन सबूत न होने की बात कहकर अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस पर सीबीआई ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने उस वक्त कहा था कि जांच एजेंसी ने वक्त बीतने के बाद अपील की है। इस वजह से इसे मान्य नहीं किया जा सकता। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने मामले को सुना। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए कहा कि एक ही गवाही पर कुछ लोगों को दोषी करार देना और साजिश रचने वाले को बरी करना कानूनी तौर पर गलत है। हाईकोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद अमित जोगी ने वीडियो जारी कर कहा था कि उनको सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि अमित जोगी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से मिली सजा बरकरार रहेगी या नहीं। फिलहाल अमित जोगी को राहत मिल गई है।
