होर्मुज का मसला न सुलझने का कच्चे तेल पर असर, कीमत बढ़कर इतनी हुई
नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मसला न सुलझने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में फिर बढ़ोतरी होने लगी है। होर्मुज पर एक तरफ अमेरिका ने नाकेबंदी लगा रखी है। वहीं, ईरान की आईआरजीसी की तरफ से जहाजों पर हमले का खतरा है। नतीजे में होर्मुज स्ट्रेट होकर बहुत कम जहाज निकल रहे हैं। इससे कच्चा तेल कम आ रहा है और इसकी कीमत में इजाफा देखने को मिला है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कई बार कहा कि वो अपनी नौसेना से होर्मुज को पूरी तरह खुलवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं कर सके और फिर खुद ही नाकेबंदी भी कर दी।
ब्रेंट क्रूड की कीमत मंगलवार को 95 डॉलर से नीचे चली गई थी, लेकिन बुधवार को इस कच्चे तेल के दाम 98.20 डॉलर प्रति बैरल हो गए। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पर है। मर्बन क्रूड की कीमत में बड़ा उछाल आया है। इसके दाम 97 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। अगर होर्मुज का मसला न सुलझा और अमेरिका व ईरान में समझौते के बजाय तनाव जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमत आने वाले दिनों में और बढ़ने के आसार दिख सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और अब तनाव जारी रहने के कारण दुनिया के बड़े हिस्से में ऊर्जा की स्थिति बहुत दबाव में है।
होर्मुज से होकर दुनिया के कुल कच्चे तेल का 20 से 25 फीसदी आता रहा है। जो 21-22 मिलियन बैरल हर रोज का है। अब इसमें बड़ी गिरावट आई है। होर्मुज से होकर एलपीजी और एलएनजी भी आता था, लेकिन अमेरिका से जंग के दौरान ईरान की तरफ से एलपीजी और एलएनजी प्लांट्स पर हमले किए गए। इसकी वजह से सऊदी अरब, यूएई और कतर को अपनी कई एलपीजी, एलएनजी प्लांट अनिश्चितकाल के लिए बंद करने पड़े। ईरान ने इराक से कच्चा तेल लेकर आ रहे कई जहाजों को भी निशाना बनाया। जिसका असर भी कच्चे तेल की कीमत पर पड़ा। ईरान ने होर्मुज को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। जिसकी काट फिलहाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं निकाल सके हैं।
