अमेरिका ने कच्चे तेल के मसले पर दुनियाभर के लिए फिर मुश्किल खड़ी की
वॉशिंगटन। ईरान से जारी तनातनी के बीच अमेरिका ने एक बार फिर दुनियाभर के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस और ईरान के कच्चे तेल पर दी गई सामान्य लाइसेंस छूट को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। अमेरिका के इस कदम से भारत पर भी असर पड़ना तय है। अमेरिका ने ईरान से युद्ध के दौरान रूस और ईरान के कच्चे तेल को खरीदने की छूट दी थी। जिसके बाद भारत ने मार्च में हर रोज 21 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ईरान से भी भारत ने कच्चा तेल खरीदा था। अब इन दोनों देशों से भारत के अलावा बाकी देश भी तेल नहीं खरीद सकेंगे।
अमेरिका के वित्त सचिव बेसेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कच्चे तेल की उन खेपों पर छूट लागू थी, जो 11 मार्च से पहले जहाजों पर लादी जा चुकी थी। अमेरिका ने 11 अप्रैल तक ये छूट दी थी। जो अब खत्म हो गई है। स्कॉट बेसेंट ने ये भी कहा कि ईरान पर आर्थिक कार्रवाई भी की जाएगी। जो बहुत कड़ी होगी। अमेरिका के कदम से साफ है कि वो अब ये चाहता है कि भारत समेत दुनियाभर के देश उससे कच्चा तेल खरीदें। दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन अमेरिका करता है। बीते दिनों होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये दावा किया था कि तमाम जहाज कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका का रुख कर रहे हैं। ट्रंप पहले भी अमेरिका का कच्चा तेल खरीदने के लिए देशों को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं।
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ही भारत ने कच्चे तेल खरीद के दायरे को बढ़ाया था। पहले भारत 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। अब भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है। इनमें अमेरिका और अफ्रीका के देश भी हैं। अब अमेरिका की दी हुई 30 दिन की छूट खत्म होने के बाद भारत को रूस से कच्चे तेल का आयात कम करना होगा। इसका साफ मतलब है कि उसे अमेरिका और अफ्रीका के देशों से कच्चा तेल लाना होगा। जिसका परिवहन महंगा होगा। ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमत वैसे ही ऊपर है। ऐसे में भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा भी खर्च करनी होगी। जिसका असर खजाने पर दिखना तय है।
