होर्मुज में अपने दो जहाजों को डुबोए जाने पर भारत ने अपनाया सख्त रुख, संयुक्त राष्ट्र को बता दिया अगला कदम
न्यूयॉर्क। होर्मुज में अपने दो जहाजों पर हमले और उनके डूबने की घटना के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बता दिया है कि मोदी सरकार क्या अगला कदम उठा सकती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश ने साफ कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से ऊर्जा और खाद का संकट पैदा हुआ है। इस संकट से निपटने के लिए तुरंत कुछ कदम उठाने की मांग उन्होंने की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमले, उन पर सवार आम लोगों की जिंदगी खतरे में डालने और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकना गलत है। अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान हो। भारत को ये सब मंजूर नहीं।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऊर्जा सुरक्षा पर हो रही चर्चा के दौरान कहा कि होर्मुज संकट का प्रभावी तौर पर सामना करने के लिए तुरंत ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग हो और उपाय अपनाए जाएं। उन्होंने होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा में आ रही बाधाओं के संबंध में भारत की चिंताओं को बताया। वहीं, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही के मसले पर ईरान के संसद की एनएससी प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता के दायरे में है। उन्होंने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कारोबार की सुरक्षा के लिए तय की गई है। ईरान के इब्राहिम अजीजी ने कहा कि सिर्फ व्यावसायिक जहाजों और ईरान से सहयोग करने वाले पक्षों को ही व्यवस्था का फायदा उठाने की मंजूरी होगी।
इस बीच, खबर है कि होर्मुज की नाकेबंदी करने वाले अमेरिका की नौसेना ने वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे 78 जहाजों को अब तक वापस भेजा है। अमेरिकी नौसेना ने चार जहाजों को ऐसा नाकाबिल बनाया कि अब वे आवागमन तक नहीं कर सकते। इससे होर्मुज संकट और बड़ा रूप ले सकता है। ईरान लगातार कह रहा है कि होर्मुज की नाकेबंदी उसे मंजूर नहीं है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौता न होने तक ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को होर्मुज से निकलने नहीं दिया जाएगा।
