ट्रंप का रूसी कच्चे तेल की खरीद पर छूट बढ़ाने से इनकार, भारत के सामने खड़ी हुई बड़ी दिक्कत
नई दिल्ली। भारत के सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। कच्चे तेल की कीमत अब और बढ़ सकती है। इसकी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा फैसला है। ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अस्थायी प्रतिबंध पर छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। भारत के लिए ट्रंप का फैसला बड़ा झटका है। अमेरिकी छूट के कारण भारत अब तक रूस से कच्चा तेल खरीद रहा था। इससे ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल पर आया संकट काफी हद तक दूर था। अब ट्रंप की ओर से रूस के कच्चे तेल पर प्रतिबंध में छूट न बढ़ाने से भारत के लिए भी रूस का कच्चा तेल खरीदना मुश्किल होगा। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल पर है।
ईरान युद्ध के कारण जब होर्मुज से कच्चे तेल और एलपीजी टैंकरों का आना-जाना मुश्किल हुआ, तो ट्रंप ने मार्च 2026 में सभी देशों को रूसी कच्चा तेल खरीदने की छूट दी थी। इस छूट को ट्रंप सरकार ने 16 मई तक बढ़ाया था। समुद्र में खड़े टैंकरों में भरे गए रूस के कच्चे तेल पर ये छूट दी गई थी। वहीं, यूरोप के देश रूसी कच्चे तेल पर ट्रंप के छूट का लगातार विरोध कर रहे थे। यूरोपीय देशों का कहना है कि कच्चे तेल को बेचकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए रूस अपना खजाना मजबूत कर रहा है। अप्रैल 2026 में भारत ने रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। हर रोज भारत ने रूस से 1.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा। जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 50 फीसदी रहा।
अब रूस से कच्चा तेल न खरीद पाने की वजह से भारत की पेट्रोलियम कंपनियों को दूसरे देशों से इसे आयात करना होगा। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। जिनमें से ज्यादातर खाड़ी देशों सऊदी अरब, कुवैत, इराक, ओमान और यूएई से होर्मुज के जरिए आता था। अफ्रीका, अमेरिका, कनाडा वगैरा से भारत को अब कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। जो महंगा होने के साथ ही ट्रांसपोर्ट के ज्यादा खर्च की वजह से और दिक्कत पैदा कर रहा है। नतीजे में भारत के कच्चे तेल बास्केट (सभी देशों से लिए जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा का औसत) की कीमत 140 डॉलर तक पहुंच गई है।
