आम लोगों ने पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल न किया कम तो बढ़ सकती है इनकी कीमत, पेट्रोलियम कंपनियों को रोज हो रहा 1000 करोड़ का नुकसान
नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद अभी भारत में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमत नहीं बढ़ी है। पेट्रोलियम कंपनियां अपने पास मौजूद फंड से महंगा कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन ये सिलसिला कितने दिन जारी रह सकता है? ऐसे में आसार बन सकते हैं कि पेट्रोलियम कंपनियों को सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा करना पड़े। पीएम नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों दो बार देशवासियों से अपील की है कि वे पेट्रोल और डीजल का कम इस्तेमाल करें। मेट्रो से चलें, वर्क फ्रॉम होम के साथ अगर कार चलानी पड़े तो पूलिंग करें।
पीएम मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों ने पेट्रोल की बचत के लिए अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। बीजेपी शासित यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारों ने भी ऐसा ही कदम उठाया है। हालांकि, जब तक आम नागरिक पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम नहीं करेगा, तब तक पीएम की अपील का असर दिखना मुश्किल है। ऐसे में पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं रहेगा। पेट्रोलियम कंपनियों को कच्चे तेल की खरीद पर हर रोज करीब 1000 करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है। पेट्रोल के हर लीटर पर 18 रुपए और डीजल पर 25 रुपए प्रति लीटर का घाटा पेट्रोलियम कंपनियों को हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर है। सबसे अच्छा कम सल्फर वाला ब्रेंट क्रूड का हर बैरल 106 डॉलर का हो गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच समझौता न हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत और ऊपर जा सकती है। भारत की बात करें, तो वो 40 से ज्यादा देशों से अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। भारत का क्रूड ऑयल बास्केट 140 डॉलर से ऊपर चल रहा है। यानी भारत को कच्चे तेल के एक बैरल की कीमत औसतन 140 डॉलर चुकानी पड़ रही है। ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्च इसके अलावा है। इस वजह से बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा भंडार से खर्च हो रहा है। जिसमें बचत के लिए पीएम मोदी ने आम लोगों से कदम उठाने की अपील की थी।
