भारी पड़ रही ट्रंप की होर्मुज नाकेबंदी, कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर पार, भारत के लिए भी दिक्कत
नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए दिक्कत बढ़ सकती है। वजह है कच्चे तेल की कीमत। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखने का एलान किया है। नतीजे में कच्चा तेल और महंगा हो गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 109 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गया है। भारत अपने कच्चे तेल की कुल जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बनेगा। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में उठापटक का भी कच्चा तेल खरीदने पर असर पड़ता है।
देश में अब तक सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया गया है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में जरूर बढ़ोतरी हुई है। रसोई गैस सिलेंडर के दाम में भी 60 रुपए का इजाफा हुआ था। सरकार ने इसके अलावा तेल कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी भी 10 रुपए घटाई थी, लेकिन जानकारों के मुताबिक अब भी तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक होर्मुज में हालात ऐसे ही बने रहे, तो मौजूदा वित्तीय वर्ष में तेल कंपनियों का घाटा 80000 करोड़ रुपए तक जा सकता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है।
ट्रंप की ओर से होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखने का फैसला अहम जलमार्ग से कच्चे तेल की सप्लाई के साथ ही रसोई गैस और एलएनजी की आपूर्ति के लिए भी फांसी का फंदा जैसा बन गया है। होर्मुज से होकर दुनिया के कुल कच्चे तेल का 25 फीसदी आता था। वहीं, ईरान भी होर्मुज के मसले पर सरेंडर करने के मूड में नहीं है। ईरान ने युद्ध के दौरान सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई के कच्चे तेल और गैस प्लांट्स पर बड़े हमले किए थे। जिसकी वजह से यहां कामकाज भी अभी बंद है। अगर अमेरिका और ईरान में जल्द समझौता न हुआ, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए मुश्किल और बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने E85 और E100 तेल के बारे में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर जनता से राय मांगी है। ई85 में सिर्फ 15 फीसदी पेट्रोल और 85 फीसदी एथेनॉल होगा। जबकि, ई100 पूरा ही एथेनॉल वाला ईंधन होगा।
