July 27, 2026

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थोक महंगाई दर ने अप्रैल में 42 महीने का रिकॉर्ड तोड़ा

नई दिल्ली। थोक महंगाई दर ने 42 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) बढ़कर 8.30 फीसदी रही। मार्च में थोक महंगाई दर 3.88 फीसदी थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की डीपीआईआईटी की ओर से जारी थोक महंगाई दर के आंकड़ों के बारे में बताया गया है कि इसके बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आया उछाल रहा। कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण थोक महंगाई दर बढ़ी है।

आंकड़ों के हिसाब से अप्रैल 2026 में ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई की दर 24.71 फीसदी पर पहुंच गई। जबकि, मार्च में ये 1.05 फीसदी थी। कच्चे तेल की थोक महंगाई दर 88 फीसदी से ज्यादा है। पेट्रोल की महंगाई दर 32.40 फीसदी, डीजल की 25.19 फीसदी और रसोई गैस की महंगाई दर 10.92 फीसदी दर्ज हुई है। अच्छी बात ये है कि अप्रैल में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। अप्रैल 2026 में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 2.31 फीसदी दर्ज की गई। जबकि, मार्च में ये 1.85 फीसदी थी। इसकी वजह ये है कि आलू और प्याज जैसी सब्जियां अभी महंगी नहीं हुई हैं। मीट, मछली और अंडे की थोक महंगाई दर 6.68 फीसदी रही। मार्च में ये 6.63 फीसदी थी।

आंकड़ों के मुताबिक कच्चे सामान की महंगाई दर बढ़कर 9.17 फीसदी हुई है। जो पहले 6.36 फीसदी थी। जबकि, तैयार सामान की महंगाई दर 4.62 फीसदी दर्ज हुई। मार्च 2026 में ये 3.39 फीसदी रही थी। इससे साफ है कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र यानी फैक्ट्रियों में सामान तैयार करना भी महंगा हो गया है। अन्य चीजों की महंगाई दर 43 महीने में सबसे ज्यादा 5 फीसदी दर्ज की गई है। मार्च में ये 3.7 फीसदी थी। मई 2026 में थोक महंगाई दर कितना रहता है, ये 15 जून को आने वाले आंकड़ों से पता चलेगा। फिलहाल ईरान संकट जारी रहने से आगे भी तमाम क्षेत्रों की थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी दिखने के ही आसार दिख रहे हैं।

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