होर्मुज में दो जहाजों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमत में उछाल
नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर हमले होने के बाद कच्चे तेल की कीमत में उछाल आया है। ब्रिटिश नौसेना ने बताया था कि होर्मुज में ओमान के करीब से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले हुए। इन हमलों से एक जहाज में आग भी लगी। बताया जा रहा है कि ईरान की आईआरजीसी ने दोनों जहाजों पर मिसाइल या ड्रोन से हमले किए। ईरान की मीडिया ने कहा है कि होर्मुज में अमेरिका के तय किए रूट से दोनों जहाज निकलने की कोशिश कर रहे थे। जिसकी वजह से हमला किया गया। दोनों जहाजों पर हमले से ईरान और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ने का अंदेशा हो गया है। जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत बढ़ी है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 73.14 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। जबकि, डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.36 डॉलर प्रति बैरल और मर्बन क्रूड 66.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। जहाजों पर ताजा हमले के बाद कच्चे तेल की कीमत में एक से दो डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। अगर जहाजों पर हमले की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल के दाम और ऊपर जा सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जंग के दौरान होर्मुज से बहुत कम कच्चा तेल आ रहा था। जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर हो गई थी। इससे भारत समेत तमाम देशों को कच्चा तेल खरीदने के लिए काफी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी और ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती खड़ी हुई थी।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के जिस एमओयू पर दस्तखत हुए हैं, उसमें कहा गया है कि इसके लागू होने के 60 दिन बाद से ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है। अगर दोनों देशों में तनाव नहीं भी बढ़ता, तो भी आने वाले दिनों में होर्मुज के रास्ते आने वाले कच्चे तेल की कीमत में इजाफा होना तय है। होर्मुज को ईरान ने जंग के दौरान हथियार की तरह इस्तेमाल किया। उसने ये नियम भी बनाया कि आईआरजीसी से मंजूरी लिए बगैर कोई भी जहाज होर्मुज से नहीं गुजरेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि जिन दो जहाजों पर हमले हुए, उन्होंने आईआरजीसी से को-ऑर्डिनेशन नहीं किया होगा।
