मुस्लिम अगर दूसरी शादी करे तो क्या वो रद्द हो सकती है?, कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला
बेंगलुरु। अगर किसी मुस्लिम ने दूसरी शादी की है, तो क्या वो रद्द हो सकती है? इस सवाल पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई मुस्लिम स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत शादी करता है, तो वो इस एक्ट की शर्तों को मानने के लिए बाध्य है। ऐसा न करने पर दूसरी शादी शून्य मानी जाएगी। कर्नाटक हाईकोर्ट का ये फैसला शादी संबंधी कानून और मुस्लिम पर्सनल लॉ के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट स्वायत्त कानून है। जिसकी शर्तों पर पर्सनल लॉ नहीं चल सकता। कर्नाटक हाईकोर्ट ने महिला की याचिका पर ये फैसला दिया। महिला की शादी 24 अप्रैल 2008 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई थी। महिला अपने मुस्लिम पति की दूसरी पत्नी हैं। उनके पति की मौत के बाद कर्नाटक के बल्लारी में सिविल जज के सामने संपत्ति के बंटवारे के केस में बेटी के साथ कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर महिला ने शामिल होने का आवेदन दिया था। सितंबर 2024 में कोर्ट ने आवेदन को मंजूरी दी, लेकिन इस आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट के प्रावधानों का जिक्र करते हुए आदेश रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ये तथ्य सामने आया कि महिला की पहली शादी अब भी कानूनन रद्द नहीं हुई थी। बावजूद उसने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दूसरी शादी की। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 24 के तहत अगर धारा 4 की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो ऐसा विवाह शून्य घोषित किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि पर्सनल लॉ के तहत कुछ हालात में मुस्लिम व्यक्ति को कई शादी करने की मंजूरी है, लेकिन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की, तो इस कानून के प्रावधान मानने होंगे। कोर्ट ने कहा कि ये कानून सभी को समान नागरिक और धर्मनिरपेक्ष विवाह व्यवस्था देता है। एक्ट की धारा-4 में साफ है कि शादी के वक्त दोनों पक्षों का कोई जीवित जीवनसाथी न हो।
