क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र, मिडिल ईस्ट तनाव, होर्मुज संकट और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर हुई बात
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आज दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की फॉरेन मिनिस्टर पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने हिस्सा लिया। इस बैठक में चारों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मिडिल ईस्ट तनाव, होर्मुज संकट, हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर सभी देशों ने मिलकर प्रतिबद्धता जताई। बैठक के बाद चारों विदेश मंत्रियों ने प्रेस को साझा संबोधन भी दिया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, क्वाड के विदेश मंत्रियों की एक बेहद सार्थक और उपयोगी बैठक संपन्न हुई है। अधिकांश चर्चाएं वर्तमान वैश्विक स्थिति पर केंद्रित रहीं।
जयशंकर ने कहा कि लोकतांत्रिक राष्ट्रों के रूप में, हमने आतंकवाद के साझा खतरे का मुकाबला करने पर भी ध्यान दिया। आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए और राष्ट्रों को आत्मरक्षा का अधिकार है। एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई आयाम और पहलू हैं। आज की हमारी बैठक में इनमें से कई क्षेत्रों में हुई प्रगति का जायजा लिया गया, जबकि अन्य क्षेत्रों में प्रगति को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। आने वाले दिनों में, चाहे वह आर्थिक गतिविधि हो, ऊर्जा व्यापार हो या समुद्री वाणिज्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। इसको देखते हुए हमने स्वाभाविक रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित विशिष्ट मुद्दों पर भी ध्यान दिया।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, चूंकि हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में फैले चार समुद्री लोकतांत्रिक देश हैं, इसलिए विचारों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। निगरानी और क्षेत्र जागरूकता, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, पनडुब्बी केबल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एचएडीआर) गतिविधियों सहित समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हम आने वाले समय में इन क्षेत्रों को और अधिक मजबूत करेंगे।
