शादीशुदा महिला अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगे तो क्या वो दहेज की मांग के बराबर?, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दी इस पर अहम राय
कोलकाता। क्या कोई शादीशुदा महिला अपने पति के दबाव में पैतृक संपत्ति में वैध हिस्सा मांगे, तो वो दहेज की मांग के बराबर है या नहीं? इस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम राय दी है। कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई महिला ऐसा करती है, तो ये दहेज की मांग के बराबर हो सकती है। कलकत्ता हाईकोर्ट में जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्वा सिन्हा राय की बेंच ने दहेज हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा के खिलाफ शख्स की अपील को आंशिक तौर पर स्वीकार करते हुए ये बात कही।
कलकत्ता हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि एक महिला अपनी पैतृक संपत्ति में वैध हिस्सा मांग सकती है, लेकिन अगर पति की ओर से दबाव के कारण ऐसी मांग की जाती है, तो ये दहेज के दायरे में आएगा। ये मामला महिला और उसकी नाबालिग बेटी की मौत से संबंधित है। जून 2014 में महिला अपनी ससुराल में फांसी पर लटकी मिली थी। ट्रायल कोर्ट ने पाया कि महिला ने बेटी की हत्या के बाद खुदकुशी की। ट्रायल कोर्ट ने महिला के पति और सास-ससुर को क्रूर व्यवहार और दहेज हत्या का दोषी बताया। पति को कोर्ट ने उम्रकैद और सास-ससुर को 7-7 साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ महिला के पति ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दी।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दहेज की मांग का कोई सबूत नहीं है। महिला ने अपनी पैतृक संपत्ति में कानूनन हिस्सा मांगा था। वहीं, कोर्ट ने सबूतों को देखा और पाया कि महिला के भाई ने पहले पैतृक संपत्ति का कुछ हिस्सा बेचकर अपनी बहन को रकम का हिस्सा दिया था। कोर्ट ने पाया कि इसके बाद भी शख्स अपनी पत्नी पर दबाव डालता रहा कि भाई से बाकी संपत्ति बेचकर पैसे देने के लिए कहे। कोर्ट ने गवाह न होने से केस कमजोर होने की बात भी नहीं मानी। शख्स ने दलील दी कि पत्नी और बेटी की मौत के दो दिन बाद एफआईआर दर्ज करने पर भरोसा नहीं कर सकते, क्योंकि महिला के भाई ने ऐसा कराने से पहले वकीलों से सलाह ली। इसे भी कोर्ट ने नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में रिश्तेदार और करीबी स्तब्ध होकर फैसला लेने में देरी करते हैं।
