गुरु पूर्णिमा पर श्री राधा माता वैष्णो मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नरेंद्र बंसल
गाजियाबाद| गाजियाबाद के कोट गांव फाटक स्थित श्री राधा माता वैष्णो मंदिर में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। भक्तों ने गुरु मां श्री राधा माता जी को फूलों की मालाएं पहनाकर तथा उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर की महंत बाल ब्रह्मचारी गुरु मां श्री राधा माता जी छह वर्ष की आयु से ही सन्यास जीवन में हैं। वह मां वैष्णो की अनन्य उपासक एवं पुजारी हैं। बताया जाता है कि उन्होंने लगभग 60 वर्ष पूर्व इस मंदिर का निर्माण कराया था और तभी से यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराती आ रही हैं। मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को माता रानी का दरबार लगता है, जहां दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु माता जी का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य पूजन-अर्चन किया गया। आश्रम परिसर पूरे दिन भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम के दौरान गुरु माता जी ने शिष्यों को गुरु मंत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल एवं मंगलमय जीवन की कामना की। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना एवं सामूहिक पाठ का आयोजन भी किया गया। भक्तों ने “गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वरः, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः” तथा “अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्, तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः” का श्रद्धापूर्वक सामूहिक उच्चारण किया।
कार्यक्रम में वैद आचार्य वेदांती जी महाराज ने वैदिक मंत्रों के साथ विधि-विधान से पूजा-पाठ संपन्न कराया और उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद जीवन में सद्बुद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। गुरु माता जी ने भी भक्तों को सत्य, सेवा, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए जीवन को शुभ कर्मों से सफल बनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गुरु माता जी का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन को धर्म और मानव सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। पूरे दिन मंदिर एवं आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह का अनुपम वातावरण बना रहा।
