रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, भारत पर भी 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान
वॉशिंगटन। अमेरिकी संसद के सीनेट में रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने का बिल पास हुआ है। इस बिल के प्रावधान के तहत भारत पर भी अमेरिका 100 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। वजह ये है कि रूस से भारत 15 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल की खरीद करता है। अगर ये बिल अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा से भी पास होकर कानून बनता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर प्रतिबंधों के साथ टैरिफ लगाने की दिशा में बढ़ते हैं, तो भारत और अमेरिका के रिश्ते फिर बिगड़ सकते हैं।
अमेरिकी सीनेट में बिल के पक्ष में 86 सांसदों ने वोट दिया। जबकि, 12 सांसदों ने बिल का विरोध किया। बिल के तहत रूस पर प्रतिबंध के साथ उससे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। ताकि वे रूस से कच्चे तेल की कम खरीदारी करें। बीते दिनों दिवंगत हुए ट्रंप के करीबी सांसद लिंडसे ग्राहम ने अप्रैल 2025 में अमेरिकी सीनेट में ये बिल पेश किया था। ग्राहम ने कहा था कि ट्रंप ने उनको बिल पेश करने की मंजूरी दी है। खास बात ये है कि अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को उस वक्त लिंडसे ग्राहम का बिल पास किया, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अमेरिकी संसद गए थे।
भारत और अमेरिका के बीच अभी व्यापार समझौते पर अहम बातचीत चल रही है। ऐसे में लगता तो नहीं कि ट्रंप इस बिल के तहत भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएंगे, लेकिन व्यापार समझौते को अमेरिका के पक्ष में करने और कई मांगें मनवाने की कोशिश के तहत ट्रंप इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल जरूर कर सकते हैं। लिंडसे ग्राहम का बिल ऐसे वक्त सीनेट से पास हुआ है, जब होर्मुज से कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई बाधित है। जिसकी वजह से भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। साथ ही पेट्रोल और डीजल भी रूस अभी भारत से ले रहा है। क्योंकि यूक्रेन ने ड्रोन से रूस की कई रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। यूरोपीय देश भी भारत से बड़ी तादाद में पेट्रोल और डीजल खरीदते हैं। जिसे रोकने के लिए भी लिंडसे ग्राहम ने ये बिल पेश किया था।
