अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट से खारिज
नई दिल्ली। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दायर सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात की रिव्यू पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। वृंदा करात ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उसके 29 अप्रैल को दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की गई थी। दरअसल अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों को लेकर उनके खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। बेंच ने कहा, हमने रिव्यू पिटीशन और उसके समर्थन में दिए गए आधारों को देखा है। हमें पूर्व आदेश में ऐसी कोई कमी नहीं दिखी, जिसके लिए उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो।
दरअसल, यह मामला जनवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए भाषणों से जुड़ा है, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। वृंदा करात ने तत्कालीन वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर और तत्कालीन बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा पर चुनावी रैली में भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की थी। वृंदा करात ने सबसे पहले दिल्ली पुलिस में शिकायत दी और ठाकुर और वर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए और 295ए के तहत समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के अपराधों के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग उठाई। पुलिस द्वारा आपराधिक मामला दर्ज करने से इनकार करने के बाद, करात ने निचली अदालत में याचिका दायर कर पुलिस को ठाकुर और वर्मा के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश देने की मांग की।
निचली अदालत ने वृंदा करात की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि लोक अधिकारियों के खिलाफ अभियोग शुरू करने से पहले दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 196 और 197 के तहत पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी साल 2022 में इस मत की पुष्टि की, फिर वृंदा करात ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसी साल 29 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि देश के गद्दारों को लेकर दिए उनके भाषणों में ऐसा कुछ नहीं है कि उनके खिलाफ अपराध साबित हो।
