जीडीपी में बढ़ोतरी की दर 7 फीसदी से ज्यादा हो सकती है : एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट
नई दिल्ली। सोमवार से बुधवार तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक समिति (एमपीसी) की बैठक होने वाली है। लोन की ईएमआई चुकाने वालों की नजर आरबीआई की हर एमपीसी बैठक पर रहती है। खासकर रेपो रेट पर। क्योंकि इसी बैठक में आरबीआई ब्याज दरों पर फैसला करता है। आरबीआई की होने वाली एमपीसी बैठक पर भी लोन लेने वालों की नजर जरूर होगी। क्योंकि इसी बैठक के नतीजे तय करेंगे कि लोन पर ईएमआई घटेगी या नहीं। हालांकि, आरबीआई की एमपीसी बैठक से पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) रिसर्च की रिपोर्ट आई है। जो ईएमआई पर अच्छे संकेत नहीं दे रही।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-2027 की पहली तिमाही में जीडीपी में बढ़ोतरी की दर 7 फीसदी से ज्यादा हो सकती है। साथ ही रिपोर्ट में महंगाई, अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता और मुद्रा पर दबाव का हवाला भी दिया गया है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि महंगाई की दर अगली 2 तिमाही में भी 5 फीसदी से ऊपर रहेगी। जो मौजूदा वित्त वर्ष में भी औसत 5 फीसदी रह सकती है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई के लिए संभावित नतीजे स्थिर रहने वाले हैं। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट संकेत देती है कि आरबीआई शायद ही रेपो रेट में कटौती करे। क्योंकि रेपो रेट घटाने से महंगाई के और बढ़ने की आशंका पैदा हो जाएगी।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में मॉनसून की बारिश ठीक-ठाक हुई है। इससे बारिश की औसत की कमी कम होकर 13 फीसदी रह गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में जलाशयों में जलस्तर सामान्य हो गया है और खरीफ फसलों की बुवाई 2025 के मुकाबले मामूली तौर पर कम है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट मूलभूत आर्थिक सिद्धांतों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। साथ ही एसबीआई रिसर्च ने ये अनुमान भी लगाया गया है कि आरबीआई ने 24 जुलाई तक 12.5 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाया है। इसके अलावा अल्पकालिक एडवांस लोन भी 13 अरब डॉलर तक कम किया है।
