ट्रंप ने 200 फीसदी तक टैरिफ का एलान किया तो भारतीय दवा कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ ने खोला बाजार
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित दवा पर 200 फीसदी तक टैरिफ का एलान किया है। इससे भारत में दवा बनाने वाले चिंतित थे, लेकिन अब उनकी चिंता दूर होने वाली है। यूरोपीय संघ के केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने भारत की कई कंपनियों को दवा में इस्तेमाल होने वाले एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट्स के निर्यात की मंजूरी दी है। हालांकि, भारत की दवा कंपनियों को एपीआई का निर्यात करने में यूरोप के सख्त नियम-कानून का पालन करना होगा।
यूरोपीय संघ की ओर से दी गई मंजूरी के तहत अब भारत की कंपनियां वहां कैंसर, एंटीबायोटिक और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए बनाई जाने वाली दवा का एपीआई निर्यात कर सकेंगे। तेलंगाना की ऑनर लैब लिमिटेड के साथ महाराष्ट्र की यूनिमैक्स केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड और रवि बायोलाइफ प्राइवेट लिमिटेड को यूरोपीय संघ को दवा की एपीआई निर्यात की मंजूरी दी गई है। मंजूरी के बाद सभी कंपनियों को गुणवत्ता के मानकों का पालन करना होगा। अगर कभी गड़बड़ी मिली, दवा की गुणवत्ता में कमी या भारत व अंतरराष्ट्रीय नियामकों ने रिपोर्ट में कोई खामी बताई, तो इसकी जानकारी 7 दिन में देनी होगी। नियम न मानने पर दवा के एपीआई निर्यात की मंजूरी तुरंत निलंबित या रद्द होगी।
बीते दिनों ही ट्रंप ने अमेरिका में आयात की जाने वाली दवाइयों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसके तहत 1 अगस्त 2026 से दो साल तक बाहर से आने वाली दवा पर कोई टैरिफ नहीं होगा। उस दौरान विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में प्लांट लगा सकेंगी। वहीं, तीसरे साल से 100 फीसदी और अगस्त 2028 के बाद आयातित दवा पर अमेरिकी सरकार 200 फीसदी टैरिफ लगाएगी। ट्रंप सरकार का कहना है कि दवा बनाने वाली कंपनियों को अमेरिका में ही फैक्ट्रियां और उपकरण लगाने के लिए बाध्य करने के वास्ते टैरिफ लगाने का फैसला किया गया है। भारत हर साल औसतन 9.7 अरब डॉलर की दवा अमेरिका को निर्यात करता है। जो उसके कुल दवा निर्यात का करीब 38 फीसदी है।
