एंटी पेपर लीक बिल में विपक्ष ने क्यों सुझाए 93 संशोधन?
नई दिल्ली। लोकसभा में आज एंटी पेपर बिल पर चर्चा होनी है। प्रश्नकाल के बाद एंटी पेपर लीक बिल पर करीब 6 घंटे चर्चा होगी। बिल के जरिए मोदी सरकार पेपर लीक संबंधी 2024 के कानून में संशोधन करना चाहती है। सरकार ने बिल में पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया है। सरकार के इन प्रावधानों से विपक्ष संतुष्ट नहीं है। विपक्ष की ओर से बिल में 93 संशोधन सुझाए गए हैं। इन सभी को शामिल करने पर विपक्ष जोर देगा। ऐसे में सबकी नजर इस पर है कि सरकार इन सभी संशोधनों को मंजूर करती है या कुछ को।
दरअसल, विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार ने एंटी पेपर लीक बिल में जितने दिन की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया है, उससे पेपर लीक होना रोका नहीं जा सकता। विपक्ष का कहना है कि अधिकतम जेल की सजा की जो समयसीमा तय की गई है, उसकी जगह पेपर लीक के दोषियों को उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए। साथ ही जुर्माने की राशि बढ़ाने और संशोधित कानून लागू करने संबंधी कई संशोधन भी विपक्ष ने सुझाए हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान इन संशोधनों को बिल का हिस्सा बनाने पर विपक्ष जोर दे सकता है।
केंद्र सरकार ने पब्लिक एक्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026 में पेपर लीक के मामलों के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रावधान किया है। साथ ही पेपर लीक की जांच के लिए 2 महीने और फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैसला सुनाने के लिए 3 महीने का वक्त मुकर्रर किया है। बिल के पास होने के बाद पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए 3 से 5 साल कैद और 1 करोड़ जुर्माना, अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर 5 से 10 साल की कैद और 50 लाख का जुर्माना, संगठित अपराध के लिए कम से कम 7 साल की कैद और 10 करोड़ का जुर्माना की सजा है। बिल में परीक्षा के लिए सेवा प्रदाता कंपनी को भी पेपर लीक और सजा के दायरे में लाया गया है।
