August 13, 2026

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लोनी में न्यायालय की राह हुई आसान, ट्रॉनिका सिटी में जमीन चिह्नित

रविन्द्र बंसल-

लोनी। वर्षों से न्याय की आस में गाजियाबाद जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रहे लोनी और आसपास के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लोनी में प्रस्तावित न्यायालयों की स्थापना की दिशा में प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। गुरुवार को ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित न्यायालयों के लिए भूमि चिह्नित करने की कार्रवाई की गई। मौके पर जिला जज विनोद कुमार रावत, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड, इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी के अध्यक्ष एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ल, तहसीलदार लोनी जेपी सिंह समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

जिला मुख्यालय तक पहुंचना था मजबूरी

लोनी में न्यायालय नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा आम वादकारियों को भुगतना पड़ता रहा है। मुकदमों की सुनवाई के लिए लोगों को गाजियाबाद जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था। दूरी, आने-जाने का खर्च और बार-बार तारीखों पर पहुंचने में लगने वाला समय गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारियों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बड़ी बाधा बनता रहा।

कई लोगों के लिए न्यायालय तक पहुंचना ही इतना खर्चीला और समय लेने वाला था कि वे मुकदमों की प्रभावी पैरवी लगातार नहीं कर पाते थे। परिणामस्वरूप आर्थिक और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण न्याय पाने की प्रक्रिया प्रभावित होने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।

हाईकोर्ट तक पहुंची लोनी की आवाज

लोनी में न्यायालय की स्थापना की मांग वर्षों से उठती रही है। इस मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं भी दाखिल हुईं। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के समक्ष लोनी तहसील में न्यायालय की आवश्यकता का मामला प्रमुखता से उठा था। उस समय अदालत के समक्ष लोनी से गाजियाबाद जिला न्यायालय की दूरी और क्षेत्र की आबादी समेत कई बिंदु रखे गए थे।

इसके बाद न्यायालयों की स्थापना का मामला आगे बढ़ा और अब चार न्यायालयों की स्थापना प्रस्तावित है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इनमें अपर जिला जज स्तर के दो न्यायालय, सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग का एक न्यायालय और सिविल जज कनिष्ठ प्रभाग का एक न्यायालय शामिल है।

सिर्फ घोषणा नहीं, अब जमीन पर उतरी प्रक्रिया

लोनी में न्यायालयों के संचालन के लिए भवन, स्थान और अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का मामला लंबे समय से लंबित था। सिविल कोर्ट गाजियाबाद की इंफ्रास्ट्रक्चर उपसमिति की ओर से भी जिला प्रशासन को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए पत्र भेजा गया था। हाईकोर्ट को भी आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में आख्या भेजे जाने की प्रक्रिया बताई गई है।

यही वजह है कि ट्रॉनिका सिटी में जमीन चिह्नित करने की गुरुवार की कार्रवाई को महज औपचारिक निरीक्षण के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह इस बात का संकेत है कि लोनी में न्यायिक ढांचे को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है।

फिर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

न्यायालयों की स्थापना के लिए आवश्यक भवन और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर लोनी विकास समिति समेत अन्य लोगों की ओर से वर्ष 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में फिर जनहित याचिका दाखिल की गई। इस याचिका में प्रस्तावित न्यायालयों के संचालन के लिए भवन, स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के लिए 13 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है।

लाखों लोगों को मिलेगी सीधी राहत

लोनी में न्यायालय शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव आम वादकारियों के जीवन में दिखाई देगा। लोगों को हर तारीख पर जिला मुख्यालय तक जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। आने-जाने में खर्च होने वाला पैसा बचेगा, काम-धंधे का नुकसान कम होगा और बुजुर्गों, महिलाओं तथा दूरदराज के गांवों से आने वाले वादकारियों के लिए न्यायालय तक पहुंच आसान होगी।

इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर न्यायिक व्यवस्था मजबूत होने से अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और न्यायिक कार्य से जुड़े अन्य लोगों के लिए भी सुविधाएं बढ़ेंगी। न्यायालय के आसपास आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

वर्षों के संघर्ष का दिखने लगा परिणाम

लोनी में न्यायालय की मांग केवल अधिवक्ताओं की मांग नहीं रही, बल्कि यह क्षेत्र के आम लोगों की आवश्यकता बन चुकी थी। लगातार बढ़ती आबादी और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र के बीच जिला मुख्यालय जाकर न्याय पाने की व्यवस्था लोगों के लिए भारी पड़ रही थी।

ट्रॉनिका सिटी में भूमि चिह्नित किए जाने से अब वर्षों पुरानी मांग को नई जमीन मिल गई है। हाईकोर्ट में चली जनहित याचिकाओं, न्यायिक स्तर पर हुई कवायद और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद लोनी में न्यायालय स्थापित होने की उम्मीद पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।

अब असली परीक्षा निर्माण और संचालन की है। जमीन चिह्नित होने के बाद यदि भवन निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधाओं की प्रक्रिया भी निर्धारित समय में पूरी होती है, तो लोनी के लोगों के लिए यह सिर्फ एक नया न्यायालय नहीं, बल्कि न्याय को जिला मुख्यालय की दूरी से निकालकर आम आदमी की पहुंच तक लाने वाली ऐतिहासिक पहल साबित होगी।

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