DHFL और उसके प्रमोटरों के खिलाफ ईडी का एक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में मारी रेड
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेसर्स दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) और उसके प्रमोटरों द्वारा किए गए लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में छापेमारी की। ईडी की दिल्ली टीम ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत 19 अगस्त को सर्च ऑपरेशन चलाया था। तलाशी के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई सबूत ईडी के हाथ लगे। ईडी अधिकारियों ने जांच के दायरे में आने वाले लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए।
सीबीआई के द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने यह जांच शुरू की है। यह एफआईआर 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। एफआईआर में कहा गया है कि DHFL के पूर्व प्रमोटर्स कपिल वधावन और धीरज वधावन समेत अन्य आरोपियों ने बैंकों को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश रची। इन बैंकों ने DHFL को कुल 42,871.42 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाएं मंजूर की थीं। लोन के पैसे को DHFL के अकाउंट्स बुक में हेराफेरी करके निकाल लिया गया और उसका गलत इस्तेमाल किया गया, जिससे कंसोर्टियम के लेंडर्स को लगभग 34,615 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच से पता चला है कि यूनाइटेड किंगडम में ‘हर्टमोर हाउस’ नाम की एक विदेशी संपत्ति, जो कपिल वधावन की पत्नी वनिता वधावन के नाम पर थी, उसे कई ट्रांजैक्शन के जरिए बेच दिया गया। इन ट्रांजैक्शन में उनके नाम पर एक फर्जी देनदारी बनाई गई थी। मेसर्स अल जालोर ट्रेडिंग FZE और वनिता वधावन के बीच एक कथित लोन एग्रीमेंट किया गया और उसी के तहत UK की उस संपत्ति को गिरवी रखा गया। जांच से पता चला है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल विदेशी संपत्ति पर बोझ बनाने के लिए किया गया था, ताकि DHFL लोन फ्रॉड से भारत में पैदा हुई देनदारी को चुकाया जा सके।
