September 9, 2026

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फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में बालकृष्ण बरी, देहरादून की स्पेशल सीबीआई कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली। योग गुरु रामदेव के सहयोगी और पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को फर्जी पासपोर्ट मामले में आज बहुत बड़ी राहत मिली है। देहरादून की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए बालकृष्ण को बरी कर दिया है। बालकृष्ण पर आरोप था कि उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। यह मामला तकरीबन 15 साल पुराना है। 2011 में बालकृष्ण के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और उस वक्त यह केस काफी चर्चा में रहा था। इस केस में बालकृष्ण की गिरफ्तारी भी हुई थी।

गिरफ्तारी के बाद हालांकि बालकृष्ण को जमानत मिल गई थी। सीबीआई ने यह दावा किया था कि बालकृष्ण ने खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से 1997 में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र हासिल किया। फिर इन्हीं दस्तावेजों को बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में जमा करके वहां से पासपोर्ट हासिल किया। बुलंदशहर के खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य नरेश द्विवेदी को इस मामले में सह आरोपी बनाया गया था। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जुलाई 2011 में बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके साथ ही अदालत ने बालकृष्ण को उनका पासपोर्ट कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया था। हालांकि इसके सात साल बाद अदालत ने साल 2018 में बालकृष्ण को उनका पासपोर्ट वापस कर दिया था और उसको रिन्यू कराने की अनुमति दे दी थी।

वहीं इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद बालकृष्ण ने इसे सत्य की जीत बताया है। बालकृष्ण ने प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, विगत 15 वर्षों से मुझे एक झूठे मुकदमे में फंसाकर अपमान एवं अपयश व मानसिक प्रताड़ना में झोंककर भीतर तक तोड़ने का असफल प्रयास किया गया। अंततः ईश्वरीय कृपा, गुरुसत्ता, बड़ों के आशीर्वाद और आप सब के प्रेम, प्रार्थना तथा सद्भावनाओं से सीबीआई कोर्ट के फैसले से सत्य की विजय हुई। बालकृष्ण ने सभी के प्रेम, सहृदयता और आशीर्वाद के लिए कृतज्ञता जताई है।

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