मौलाना तौकीर रजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत, कहा- सिर तन से जुदा का नारा…
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली दंगों के आरोपी मौलाना तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिका देने वाले ने अपने धार्मिक और राजनीतिक हित पूरे करने के लिए शुक्रवार की नमाज का फायदा उठाया और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इकट्ठा होने के लिए कहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ‘सिर तन से जुदा’ का नारा भारत की आजादी को चुनौती देता है। इसकी तुलना ‘अल्लाह-ओ-अकबर’, ‘जय श्री राम’ से नहीं की जा सकती।तौकीर रजा 13 अक्टूबर 2025 से जेल में है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बरेली के प्रशासन से मंजूरी लिए बगैर तौकीर रजा ने इतनी बड़ी सभा बुलाई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने ये तर्क देने की कोशिश की कि मंजूरी न मिलने और बीएनएस की धारा 163 लागू होने के कारण इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में लोगों के इकट्ठा होने के आह्वान को रद्द किया गया, लेकिन तथ्य है कि मुस्लिम समुदाय ने बड़ी तादाद में मार्च निकाला। पुलिस ने रोका तो मारपीट की और संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया। ऐसे काम की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि घटना के बाद मौलाना तौकीर रजा की ओर से लोगों को धन्यवाद दिया और काम की तारीफ की गई। इसे भी सही नहीं ठहरा सकते।
कोर्ट ने इस मामले में यूपी के अपर महाधिवक्ता की दलील को दमदार माना कि बरेली में हिंसा के दौरान लगाया गया उकसाने वाला नारा कानून की सत्ता और भारत की संप्रभुता और एकता को चुनौती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका देने वाले पर आरोप तय होने बाकी हैं। सभी तथ्यों पर विचार के बाद जमानत याचिका खारिज की जाती है। अभियोजन का कहना है कि 26 सितंबर 2025 को मौलाना तौकीर रजा ने खास समुदाय के लोगों से इकट्ठा होने के लिए कहा था। इस पर 200-250 लोगों की भीड़ जुटी और बरेली के श्यामगंज चौराहे की तरफ बढ़ी। भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाए। पुलिस की चेतावनी नहीं सुनी। कुछ लोग आक्रामक हो गए। पुलिस पर पथराव और तेजाब से भरी बोतलें फेंकी। फायरिंग भी की गई। इससे आतंक का माहौल बना। दो अफसर चोटिल हुए। जिसके बाद पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।
