दिल्ली सत्य निकेतन इमारत हादसा मामले की हाईकोर्ट में ही होगी सुनवाई, शीर्ष अदालत ने निगरानी रखने का दिया निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि वो सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना से जुड़े मामले की निगरानी जारी रखे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को भी मौजूदा कार्यवाही के सिलसिले में अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि अब मामले में कार्रवाई शुरू हो चुकी है इसलिए वह मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करना चाहती। कोर्ट ने दिल्ली में इमारत गिरने और लखनऊ में बिल्डिंग में आग लगने की पिछली घटनाओं के संबंध में अपने पहले के आदेशों के बाद उठाए जा रहे कदमों पर भी ध्यान दिया।
इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) अधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि अनधिकृत निर्माण और अवैध पीजी हॉस्टलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के चार इलाकों और लखनऊ में निरीक्षण किया गया था। पहले जारी किए गए निर्देशों में लाजपत नगर, साकेत, मालवीय नगर, सरोजिनी नगर और लखनऊ का अलीगंज शामिल था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कार्यवाही दिल्ली के खास इलाकों या लखनऊ तक ही सीमित नहीं है।एमिकस ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट की कार्यवाही जारी रह सकती है और 25 मार्च, 2026 के आदेश (खासकर पैराग्राफ 6 और 7) और 5 अगस्त, 2026 के आदेश के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के सामने एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जा सकता है।
इस पर जस्टिस अहसानद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की बेंच ने एमिकस के सुझाव को मान लिया और कहा कि वह स्थिति में कोई बदलाव नहीं करना चाहते। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वो मामले की निगरानी करें और इसे किसी नतीजे तक पहुंचाएं। वहीं दिल्ली सरकार और MCD की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। रविवार 6 अगस्त को सत्य निकेतन इलाके में संचालित एक पीजी हॉस्टल की बिल्डिंग गिरने से 5 छात्रों समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी।
