नवी पिल्लई: भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक जिन्हें मिला है शांति का नोबेल पुरस्कार
नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक नवनेथम नवी पिल्लई को साल 2026 के शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना है। भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्लई दक्षिण अफ्रीका में वकील और जज रह चुकी हैं।
1890 के दशक में नवी के ग्रैंड पेरेंट्स बंधुआ मजदूर के रूप में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। 23 सितंबर 1941 को डरबन के क्लेयरवुड में जन्मीं नवी पिल्लई ने नेटाल यूनिवर्सिटी से बीए और कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1982 में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ लॉ और 1988 में डॉक्टर ऑफ ज्यूरिडिकल साइंस की डिग्री ली। छात्र जीवन के दौरान ही वो रंगभेद के खिलाफ मुहिम चलाने वाले संगठन नॉन-यूरोपियन यूनिटी मूवमेंट से जुड़ गई थीं। उन्होंने मानवाधिकारों की आवाज उठाते हुए लंबी लड़ाई लड़ी है।
1967 में दक्षिण अफ्रीका के नेटाल में वकालत करने वाली पहली वो महिला थीं। नेल्सन मंडेला और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्य लोगों के बचाव वकील के रूप में उन्होंने काम किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट, रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनल और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में जज के तौर पर काम किया है। वह मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र की हाई कमिश्नर भी रहीं और उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता भी की।
नवी पिल्लई अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं। न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति नवी पिल्लई की प्रतिबद्धता उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है जो एक अधिक शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं। ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय अदालती मामलों में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून की संस्थाओं को मजबूत करने में भी योगदान दिया है। उनकी निष्पक्षता, विशेषज्ञता और दृढ़ता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों में से एक बना दिया है।
