जानिए देश में बनी Corbevax वैक्सीन के बारे में, जिसे मोदी सरकार ने दी है मंजूरी
नई दिल्ली/हैदराबाद। केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ जारी देश की जंग को और मजबूत करते हुए 2 नई वैक्सीन और एक पिल को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसकी जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर दी। मंडाविया ने बताया कि इनमें से एक वैक्सीन कोरबेवैक्स है। ये वैक्सीन देश की पहली आरबीडी वैक्सीन है। मंडाविया ने अपने ट्वीट में इस वैक्सीन के बारे में और जानकारी दी है। इस वैक्सीन को हैदराबाद की वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल ई ने बनाया है। इससे पहले देश में सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक और रूस की बनी वैक्सीन लोगों को लगाई जा रही थी। नई वैक्सीन के आने से कोरोना और उसके नए ओमिक्रॉन वैरिएंट को पछाड़ने में मदद मिलेगी।
आरबीडी आखिर होता क्या है? चलिए आपको बताते हैं। हर कोरोनावायरस के बाहर एक प्रोटीन का शेल होता है। इसी में आरबीडी रिसेप्टर लगे होते हैं। इन रिसेप्टरों के जरिए ही कोरोनावायरस किसी व्यक्ति की कोशिकाओं से चिपकता है और शरीर के सांस लेने वाले अंगों तक इसकी पहुंच होती है। आरबीडी के इन्हीं हिस्सों से वैक्सीन बनाई जाती है। इस वैक्सीन को बनाने के बाद हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को पता चल जाता है कि इस किस्म के आरबीडी रिसेप्टर्स के जरिए शरीर में बीमारी घुस सकती है। ऐसे में जब कोरोना का वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो वैक्सीन की वजह से बनी एंटीबॉडी उसके आरबीडी रिसेप्टर को पहचान कर उससे मुकाबला शुरू कर देती हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में बायोलॉजिकल ई की ये वैक्सीन बाजार में आ जाएगी। अभी इसकी कीमत के बारे में कोई खुलासा नहीं हुआ है। बता दें कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और रूसी स्पूतनिक की कीमत 1300 से 1800 रुपए के बीच है। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन का एक डोज 780 रुपए में निजी अस्पताल लगाते हैं। मोदी सरकार इसके अलावा देशभर में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों को मुफ्त वैक्सीन भी मुहैया करा रही है।
