June 20, 2026

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Assembly elections: 5 राज्यों के चुनावों में महिला वोटर्स का रहा बोलबाला, चुनावी नतीजे में निभा सकती हैं अहम भूमिका!

नई दिल्ली। आज यूपी में सातवें चरण का मतदान समाप्त होते ही अटकलबाजियों का दौर शुरू हो जाएगा। करीब तीन पखवाड़े से चला आ रहा चुनावी बिगुल भी अब शांत हो जाएगा और नेता से लेकर प्रवक्ता तक में  सरकार बनने, बनाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। बहरहाल, अब जबकि चुनाव की सरगर्मियां समाप्त होने को हैं, हमारे पास देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के मतदान से संबंधित कुछ बेहद शानदार आंकड़े उपलब्ध हुए हैं। हम उन आंकड़ो को तफ्सील से जानेंगे और उसके पीछे की वजहों को भी समझने की कोशिश करेंगे।

उत्तराखंड और गोवा में महिलाओं ने किया पुरुषों से ज्यादा मतदान

पांच राज्यों में अब तक संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने शानदार शक्ति प्रदर्शन किया है। गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, पंजाब में अब तक यूपी को छोड़ दिया जाए तो सभी राज्यों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। यूपी में भी आज यानी 7 मार्च को सातवें और आखिरी चरण का मतदान समाप्त होने वाला है। लेकिन इस बीच सबसे दिलचस्प चीज जो हमें देखने को मिली है, वो यह कि उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा लोकतंत्र में विश्वास दिखाया है, और जमकर वोटिंग करते हुए पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। पुरुषों और महिलाओं के वोटिंग पैटर्न में सबसे बड़ा अंतर उत्‍तराखंड में देखने को मिला है। यहां 62.6% पुरुषों ने वोट डाले हैं, जबकि महिलाओं का आंकड़ा 67.2% रहा है। वहीं, गोवा में भी यही चीज देखने को मिली है, यहां भी वोटिंग के लिए पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के पैर बाहर निकले।

मणिपुर में 90% महिलाओं ने डाला वोट

पूर्वोत्तर भारत में स्थित और म्यांमा की सीमा से सटा मणिपुर राज्य यूं तो आदिवासी बहुल राज्य है, लेकिन यहां भी लोकतंत्र के लिए आस्था जमकर देखने को मिली है। यहां पुरुषों ने वोट तो किया ही है, महिलाओं ने भी रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले हैं। यहां 90% महिलाओं ने वोट किए हैं, यह पिछले बार की संख्या में 2% ज्यादा है। पिछली बार 88% महिलाओं ने वोट किए थे।

यूपी में भी महिला वोटरों की संख्या बढ़ी लेकिन पिछली बार से कम ही रहा आंकड़ा

देखा जाए तो यूपी में 20 फरवरी के बाद से ही महिला वोटर्स ने पुरुषों पर बढ़त बना रखी थी। छठे चरण में 62.62 प्रतिशत महिला वोटर्स ने मतदान किया था, जबकि महिलाओं की तुलना में वोट के लिए 51.03% पुरुष मतदाता ही बाहर निकल पाए थे। पांचवें चरण में भी महिलाओं की बढ़त बढ़कर 3.89 परसेंटेज पॉइंट्स तक पहुंच गई थी। छठे चरण में भी यही ट्रेंड बरकरार रहा था। लेकिन ओवरऑल आंकड़ों की बात की जाए तो 2017 के मुकाबले यूपी में महिला वोटर्स इस बार वोट के लिए कम संख्‍या में ही निकली। वहीं, यूपी के अलावा पंजाब विधानसभा की बात की जाए तो यहां भी वोटिंग के लिए महिला और पुरुषों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। यहां भी पुरुष और महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत लगभग बराबर ही रहा है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने उठाए विभिन्न कदम

चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने कई कदम उठाए जिसमें महिलाओं को कम्फर्ट महसूस कराने और सुरक्षा के लिए बूथ पर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को तैनात किया गया। कई बूथों पर तो केवल महिला स्टाफ्स को ही रखा गया। इसके अलावा पोलिंग स्टेशंस पर क्रैच सुविधा दी गई। महिला मतदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाया गया।

कई जगहों पर महिला वोटर्स का रहा है अद्भुत रोल

दक्षिण भारत की बात करें तो महिला वोटर्स वहां एक शक्ति के रूप में हैं। तमिलनाडु की बात की जाए या फिर आंध्र प्रदेश की सरकारों की, महिलाओं ने इस बात के निर्धारण में ठीक-ठाक रोल निभाया था कि वहां सरकार किसकी बनेगी। इसके अलावा बिहार में 2010 विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार की बड़ी जीत के पीछे महिला वोटर्स को ही कारक बताया गया था।

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