February 16, 2026

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राजपूत नहीं थे पृथ्‍वीराज चौहान? दिल्ली हाईकोर्ट से गुर्जर समाज के पक्ष में आया फैसला

नई दिल्ली। बहुचर्चित “सम्राट पृथ्वीराज” फ़िल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का गुर्जर समाज के पक्ष में बड़ा फैसला!! जज ने यशराज बैनर को कहा आप ये स्पष्ठ क्यो नही कर देते की पृथ्वीराज चौहान राजपूत नहीं है, आप चुप क्यों है! दिल्ली हाईकोर्ट में गुर्जर समाज  द्वारा दायर याचिका (W.P.(C) 8990/2022 में आपत्ति जताई गई थी कि इतिहास में दर्ज अनेको तथ्यों में महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान को स्पष्ठ रूप से गुर्जर सम्राट व गुर्जर नरेश कहा गया है, उनके पिता के साथ भी गुर्जर जुड़ा हुआ है फिर भी यशराज फ़िल्म्स के बैनर तले बनी फ़िल्म में महान गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज  को चंद असामाजिक तत्वों के दबाव में जबर्दस्ती राजपूत राजा दिखाने के प्रयासः किये जा रहें है, इस कृत्य को घोर आपत्तिजनक बताते हुए इस फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की अपील की थी ।

1 जून 2022 को दिल्ली हाईकोर्ट की 2 जजों की पीठ ने इस मामले को सुनते हुए यशराज बैनर को कहा आप ये स्पष्ठ क्यो नही कर देते की पृथ्वीराज चौहान राजपूत नही है, इस मामले में आप चुप क्यों है! अक्षयकुमार अभिनीत इस फ़िल्म को बनाने वाले यशराज बैनर ने इस विवाद से पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ठ कर दिया है कि उनकी फ़िल्म में पृथ्वीराज चौहान को राजपूत सम्राट नही दिखाया जाएगा।

फैसले को लेकर गुर्जर समाज मे जबरदस्त उत्साह है और उन्होंने कहा कि ऐतेहासिक तथ्यों के अनुसार राजपूत कोई जाति है ही नही ओर राजपूत शब्द का उल्लेख 12वी शताब्दी के बाद ही इतिहास की पुस्तकों में आता है, जबकि चंद असामाजिक तत्व बार बार “गुर्जर-प्रतिहार राजवंश” के नाम से छेड़छाड़ करके केवल अब केवल “प्रतिहार राजवंश” बताकर 300 वर्षों तक मुश्लिम आक्रांताओ से देश व धर्म की रक्षा करने वाले महानतम गुर्जर-प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज महान ओर उनके वंशजो को भी राजपूत बताने लगे हैं.

इसी कड़ी में अब सम्राट पृथ्वीराज को भी राजपूत घोषित कर रहें थे जबकि ऐसा नही, राजपूत समाज के इन चंद असामाजिक तत्वों की हिंदुओ को जाति के नाम पर तौड़ने की हरकतों के कारण ही उत्तरप्रदेश के दादरी में “गुर्जर सम्राट मिहिरभोज डिग्री कॉलेज” में मिहिरभोज की प्रतिमा के अनवारण के समय गुर्जर शब्द पर आपत्ति जताते हुए गुर्जर शब्द को असमाजिक तत्वों द्वारा कालिख़ पौतकर छिपा दिया गया था, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी द्वारा कालिख़ पुती प्रतिमा के अनावरण के बाद उपजे गुर्जर समाज के आक्रोश के कारण योगी सरकार ने इस त्रुटि को अपने राज्यसभा साँसद सुरेंद्र नागर को भेजकर सही कराया और गुर्जर शब्द को पुनः स्थापित कराया था जिसके बाद विवाद का पटाक्षेप हो गया था हालांकि गुर्जर समाज योगी जी व बीजेपी द्वारा इस विषय पर माफी माँगने की माँग करता रहा है।

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