April 22, 2026

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3 सप्ताह का समय चाहिए’, नेशनल हेराल्ड मामले में ED के एक्शन के बाद सोनिया गांधी ने लगाई गुहार

नई दिल्ली। तब राहुल विलायत में थे। सोनिया पार्टी की गतिविधियों में मसरूफ थीं और बता करें प्रियंका की तो वो भी पार्टी की गतिविधियों में ही मशगूल थीं, लेकिन उससे पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने गांधी परिवार को सकते में डालते हुए समन जारी कर दिया था। बकायदा समय सीमा निर्धारित करते हुए। पता ही होगा कि आपको ईडी ने गांधी परिवार के खिलाफ यह कार्रवाई नेशनल हेराल्ड मामले में की थी। लेकिन, ई़डी के एक्शन के बाद सोनिया ने पहले खुद के कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी दी। इसके बाद अब उन्होंने सामने आकर जांच एजेंसी से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। अब ऐसे में देखना होगा कि तीन सप्ताह के उपरांत अंतरिम अध्यक्ष जांच एजेंसी के समक्ष पेश होती हैं की नहीं। फिलहाल सोनिया आइसोलेशन में हैं। जिसे देखते हुए उन्होंने जांच एजेंसी से तीन सप्ताह के अतिरिक्त समय की मांग की है। हालांकि, अभी तक जांच एजेंसी की तरफ से तीन सप्ताह के अतिरिक्त समय को लेकर अंतिम मुहर नहीं लगाई गई। चलिए, आगे जानते हैं कि नेशनल हेराल्ड का मामला क्या है, जिसे लेकर सोनिया गांधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।

जानें क्या है पूरा मामला

दरअसल, इस पूरे मसले को समझने से पहले आपको हमारे साथ साल 1938 में चलना होगा। जब नेहरू समेत  कांग्रेस के कई नेताओं ने एसोसिएट्स जनरल नामक कंपनी बनाई थी। यह कंपनी अखबार प्रकाशित करने का काम करती थी, जिसे कई राज्यों की सरकारों की तरफ से सस्ते दामों में जमीन मिली थी। इसके बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर आरोप है कि इन्होंने बाद में एक कंपनी बनाई थी। हालांकि, इस कंपनी का मकसद व्यापार करना नहीं था, बल्कि इस कंपनी के माध्यम से एसोसिएट्स जनरल नामक कंपनी को खरीदकर उसकी 2 हजार करोड़ की संपत्ति को अपने नाम करना चाहते थे। जिसके बाद साल 2011 में राहुल और सोनिया की यंग इंडिया लिमिटेड एसोसिएट्स जनरल की कंपनी को टेकओवर कर लिया था।

बता दें कि बीजेपी की शिकायत पर यह पूरा मसला प्रकाश में आया है। जिसके खिलाफ अब ई़़डी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अब ऐसी स्थिति में आगे चलकर इस मामले में गांधी परिवार के खिलाफ क्या कुछ कार्रवाई की जाती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। ध्यान रहे कि इस मसले को लेकर जमकर राजनीति भी देखने को मिली थी। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करार दिया था।

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