राहुल गांधी दोहरी नागरिकता मामले में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी केस से अलग हुए, जानिए इसकी वजह
नई दिल्ली। राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे दोहरी नागरिकता मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने पहले राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, बाद में अपने आदेश को संशोधित करते हुए राहुल गांधी को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनने की बात कही थी। इसको लेकर याचिकाकर्ता बीजेपी नेता विग्नेश शिशिर ने जस्टिस विद्यार्थी के फैसले पर सवाल उठाए हुए सोशल मीडिया पर अलग-अलग पोस्ट किए थे। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने याचिकाकर्ता के इन्हीं सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए खुद को केस की सुनवाई से अलग कर लिया।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने आज इस केस की सुनवाई शुरू होते ही याचिककर्ता के द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या बेंच पर कीचड़ उछालना सही है? जस्टिस विद्यार्थी ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से इस बारे में सफाई देने की कोशिश की गई मगर जस्टिस विद्यार्थी ने सुनने से इनकार कर दिया। जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से मैं आहत हूं, इसलिए इस केस की फाइल मैं हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भेज रहा हूं ताकि मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन हो सके।
आपको बता दें कि 17 अप्रैल को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था मगर आदेश पर साइन करने से पहले उन्होंने हाईकोर्ट की फुल बेंच के एक फैसले Jagannath Verma Vs State of U.P. (2014) का संज्ञान लिया। इस फैसले में कहा गया है कि अगर मामला रिवीजन के दायरे में आता है, तो संभावित आरोपी को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। इस आदेश के मद्देनजर जस्टिस विद्यार्थी ने अपने पूर्व के आदेश में बदलाव किया और कहा कि इस कानूनी स्थिति को देखते हुए बिना नोटिस दिए आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।
