May 25, 2026

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नाजायज बच्चा भी पिता की संपत्ति का हकदार, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

नई दिल्ली। एक अहम और शानदार फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि महिला और पुरुष के संबंधों की वजह से पैदा हुआ नाजायज कहलाने वाला बच्चा भी अपने पिता की संपत्ति का हकदार है। जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने ये फैसला सुनाते हुए इस बारे में केरल हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पुरुष और महिला लंबे वक्त तक साथ रहते हैं, तो कानून के तहत इसे विवाह जैसा ही माना जाएगा और ऐसे में जो भी बच्चा इस संबंध से पैदा होता है, उसे पिता की संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के तहत लंबे समय तक महिला और पुरुष के साथ रहने को विवाह माना जाता है। दरअसल, केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में बच्चे के अधिकार के खिलाफ फैसला सुनाया था। जिसे पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने वारिसों को पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। हालांकि, बच्चे को ये वैज्ञानिक तरीके से साबित करना होगा कि वो उस व्यक्ति का ही है, जिससे उसकी मां के रिश्ते रहे हैं। इसके लिए डीएनए टेस्ट सबसे कारगर उपाय के तौर पर माना जाता है।

बता दें कि इसी तरह के मामले में कांग्रेस के नेता रहे और अब स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी भी फंसे थे। कांग्रेस की नेता रहीं उज्ज्वला शर्मा ने उनसे रिश्ते होने और एक बेटा होने का दावा किया था। नारायण दत्त तिवारी ने कोर्ट में इससे इनकार किया। लंबे चले मुकदमे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनका और बेटे रोहित शेखर का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया था। इस टेस्ट के बाद साबित हो गया था कि रोहित शेखर, नारायण दत्त तिवारी के बेटे हैं। इसके बाद तिवारी को रोहित और उज्ज्वला को अपनाना पड़ा था। कुछ साल पहले रोहित शेखर की हत्या हो गई थी। जिसका इल्जाम उनकी पत्नी अपूर्वा पर लगा था।

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