April 23, 2026

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Nobel Prize: जानिए, कौन हैं स्वांते पैबो, जिन्हें मिला नोबेल पुस्कार, इंसान पर किया था ऐसा रिसर्च

नई दिल्ली। विज्ञान एक गतिशील विषय है। यहां इतिहास या भूगोल की भांति कुछ स्थायी नहीं है। गतिशीलता ही इसकी प्रकृति है। लेकिन, इस गतिशीलता को बरकरार रखना सरल नहीं है। इस गतिशीलता को बनाए रखने के लिए अनेकों वैज्ञानिक कठोर परिश्रम करते हैं। दिन-रात, सुबह-शाम प्रयोगशालाओं में समय व्यतित करते हैं। आज इसी परिश्रम का प्रतिफल स्वीडन वैज्ञानिक स्वांते पैबो को मिला है। दरअसल, स्वांते पैबो को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। बता दें कि पैबो को इंसानों और विलुप्त हो चुकी प्रजाति जिनोम पर रिसर्स करने के लिए पुरस्कृत किया गया है। चलिए, आगे कि रिपोर्ट में पैबो के बारे में विस्तार से बताते हैं।

जानें, कौन हैं स्वांते पैबो

स्वांते पैबो का जन्म स्वीडन के स्टॉकहोम शहर में हुआ था। उनकी मां का नाम एस्टोनियो है, जो कि पेशे से कैमिस्ट केरिन थी। उनके पिता पेशे से बॉयोकेमिस्ट थे। साल 1982 में उनके पिता को भी नोबेल पुस्कार से सम्मानित किया गया था। उधर, अगर स्वांते पैबो की शैक्षणिक पृष्टिभूमि की बात करें, तो 1986 में उन्होंने उपासला यूनिवर्सिटी सी से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी । उन्होंने ई 19 प्रोटिन से जुड़ा शोध किया था, जो कि काफी सफल रहा।

जानें पैबो ने ऐसा क्या रिसर्च किया

बता दें कि पैबो पैलियोजेनेटिक्स के प्रणेता माना जाता है। पैलियोजेनेटिक्स का मतलब प्राचीन जीवों का अध्ययन और उनसे जुड़े अवशेषों को संरक्षित करने से जुड़ा हुआ है। पैबो ने इंसानों की शुरुआती प्रजातियों और मौजूदा इंसानों के जेनेटिक्स पर रिसर्च की है और इनके बीच संबंधों को खोजने का काम किया है। 1997 में पहली बार पैबो और उनके साथियों ने निएनडर्थल्स (मनुष्यों की सबसे प्राचीन प्रजातियों में से एक) के डीएनए की सफलतापूर्वक सीक्वेंसिंग की थी। बता दें कि पैबो शुरू से ही मानवीय गतिविधियों के अध्ययन करने में अभिरूची रखते थे। साल 2007 के टाइम्स मैंगजीन में उन्हें 10 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शुमार किया गया था, जिसके बाद लोगों की दिलचस्पी उनसे जुड़े अध्ययन सामाग्रियों का अध्ययन करने में बढ़ी।

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