June 2, 2026

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तो क्या भारतीय कफ सिरप से नहीं हुई गांबिया में 66 बच्चों की मौत ? गांबिया की सरकार ने ऐसे लिया यू-टर्न

नई दिल्ली। बीते दिनों गांबिया में एक भारतीय कफ सिरप से 66 बच्चों की मौत के बाद दुनिया भर में भारतीय सिरप को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन अब वहां की सरकार अपने बयान से पलटती हुई नजर आ रही है। गाम्बिया सरकार ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि भारतीय कफ सीरप से गुर्दे को नुकसान पहुंचने के कारण करीब 66 बच्चों की मौत हुई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर के मुताबिक, गाम्बिया के मेडिसिन कंट्रोल एजेंसी के एक प्रतिनिधि ने यह जानकारी दी है। बता दें कि कुछ दिन पहले खबर आई थी कि कफ सीरप पीने से गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत हो गई थी। तब यह आरोप लगाया गया था कि भारत में बनी कफ सीरप पीने से इन बच्चों की मौत हुई है। इसे लेकर देश में काफी हंगामा मचा था। वही डब्ल्यूएचओ ने इसको लेकर चेतावनी भी जारी की थी

आपको बता दें कि डब्ल्यूएचओ ने गांबिया में 66 बच्चों की मौत पर भारत की सिरप को लेकर अपनी चेतावनी में कहा था कि गाम्बिया में बच्चों की मौत का संबंध मेडेन फार्मा के कफ सिरप से जुड़ा हो सकता है। कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भारत में इसके दो मैन्युफैंक्चरिंग यूनिट हरियाणा के कुंडली और पानीपत में हैं। राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा में इसका कॉरपोरेट ऑफिस भी है। कंपनी ने वेबसाइट पर खुद को WHO-जीएमपी और आईएसओ 9001-2015 प्रमाणित फार्मा कंपनी बताया है। हालांकि गांबिया में 66 बच्चों की मौत के बाद सरकार ने इस कंपनी के प्रोडक्शन को बंद करवा दिया था।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले महीने गाम्बिया में हेल्थ डायरेक्टर मुस्तफा बिट्टाये ने सभी बच्चों की मौत के कारणों की पुष्टि करते हुए बताया था कि इन सभी बच्चों की मौत किडनी की गंभीर दिक्कतों की वजह से हुई है। वहीं सूत्रों के मुताबिक भारत ने अपने देश में इस तरह के सीरप की अनुमति देने के लिए गाम्बिया की स्क्रीनिंग और ऑडिट मानदंडों पर सवाल उठाया है। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक जिन 66 बच्चों की मौत हुई है, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि उन बच्चों को ई-कोलाई और डायरिया था, फिर उन्हें कफ सीरप क्यों दिया जा रहा था। अगर बच्चों की मौत ई-कोलाई और डायरिया से हुई है तो ऐसे में भारतीय सिरप के ऊपर लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं । इससे अंतराष्ट्रीय बाजार में भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों की जो छवि खराब हुई थी उसमें राहत मिलेगी।

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