अवैध खनन मामले में ईडी के सामने पेश होने से झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का इनकार
रांची। झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने अवैध खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होने से मना कर दिया है। हेमंत सोरेन को आज ईडी ने पूछताछ के लिए रांची के दफ्तर में तलब किया था। हेमंत सोरेन ने न सिर्फ पूछताछ के लिए जाने से इनकार कर दिया, बल्कि उन्होंने इसे आदिवासी के उत्पीड़न से भी जोड़ा है। उनकी तरफ से बयान आया है कि आदिवासी सीएम के खिलाफ साजिश रची जा रही है। इस मामले में झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर का भी बयान आया है। राजेश ने कहा है कि हेमंत सोरेन का पहले से रायपुर में कार्यक्रम तय है। वो वहीं जाएंगे। ठाकुर ने कहा कि ईडी के समन पर सीएम सोरेन खुद मीडिया से बात करेंगे।
ईडी ने पहले इस मामले में हेमंत सोरेन के करीबी पंकज मिश्रा को इसी साल 8 जुलाई गिरफ्तार किया था। उस दौरान ईडी ने पंकज और सोरेन के अन्य करीबियों के 18 ठिकानों पर छापे भी मारे थे। हेमंत सोरेन के करीबी पंकज मिश्रा के ठिकानों पर छापे और गिरफ्तारी के दौरान ईडी को एक लिफाफा मिला था। सूत्रों ने बताया था कि लिफाफे में हेमंत सोरेन के बैंक खाते का चेकबुक था। दो चेक पर उनके दस्तखत भी थे। पंकज जब रांची के रिम्स में भर्ती था, उस दौरान भी झारखंड के अफसरों को फोन कर उन्हें धमकाने के सबूत ईडी को मिले थे। सूत्रों के मुताबिक सबूत हैं कि पंकज और प्रेम प्रकाश समेत कुछ लोग अवैध खनन के मामले में जिलों के अफसरों को धमकी देते थे। ईडी के छापे में सोरेन के एक और करीबी प्रेम प्रकाश के घर से सीएम आवास की सुरक्षा में लगे जवानों के दो एके-47 रायफल और 60 कारतूस भी मिले थे। सीएम आवास से इस बारे में कहा गया था कि जवान वहां किसी काम से गए थे।
बता दें कि पिछले दिनों ये चर्चा तेजी से चली थी कि खनन पट्टा मामले में हेमंत सोरेन से बयान लेने के बाद उनको चुनाव आयोग ने लाभ के पद का भी दोषी पाया है। चर्चा थी कि आयोग ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की चिट्ठी गवर्नर को भेजी है। हेमंत सोरेन ने इसके बाद कई बार कैबिनेट की आपात बैठक की थी। उन्होंने गवर्नर से चिट्ठी की हकीकत बताने की मांग भी की थी। हालांकि, गवर्नर की तरफ से कभी इस मामले में कुछ नहीं कहा गया। ये मामला था कि हेमंत सोरेन को सीएम रहते और खनन विभाग का प्रभारी होने के बाद भी खनन पट्टा आवंटित हुआ था। इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में केस किया गया था। हाईकोर्ट के सवाल पूछने पर सोरेन ने पट्टा वापस कर दिया। वहीं, गवर्नर के जरिए लाभ के पद का आरोप लगाकर चुनाव आयोग से हेमंत सोरेन की शिकायत की गई थी। इस मामले में जवाब देने के लिए सोरेन दिल्ली में चुनाव आयोग के सामने पेश भी हुए थे।
