June 26, 2026

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द्रौपदी मुर्मू को बनाया राष्ट्रपति तो खुल गई भाजपा की नई राह, गुजरात चुनाव में 2002 के बाद आदिवासी बेल्ट भी ले उड़ी BJP

नई दिल्ली। गुजरात में विधानसभा चुनाव 2022 के आज नतीजे आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी अपने गढ़ गुजरात में नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। दरअसल, ये साल 2002 के बाद यह पहली बार है जब भाजपा इतने बड़े मार्जिन से जीत की ओर बढ़ रही है। गुजरात के लगभग सभी इलाकों में भाजपा कमाल कर रही है। ये इलाके कांग्रेस और भारतीय ट्राइबल पार्टी के गढ़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर जो बड़ा ट्रंपकार्ड खेला था उसमें वो कामयाब होती दिख रही है। खासकर पूर्वी गुजरात के आदिवासी इलाकों में सामने आए नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। वंसदा (एसटी) और खेड़भ्रमा की दो सीटों को छोड़कर भाजपा 23 सीटें जीतने के करीब पहुंच रही है। सूरत, तापी और भरूच जिलों जैसे डांग, निजार, व्यारा, मांडवी और झगड़िया की सभी महत्वपूर्ण आदिवासी बहुल सीटों पर परफॉर्मेंस भाजपा के लिए खुशियां मनाने जैसा है।

गौरतलब है कि साल 2002 से लगातार भारतीय जनता पार्टी पूर्वी गुजरात के कांग्रेस बहुल क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रही है। 2017 के चुनावों में कांग्रेस ने गुजरात में एसटी-आरक्षित 27 सीटों में से 15 सीटें जीतीं थी। यहां भाजपा को आठ सीटों पर संतोष करना पड़ा था। जबकि, छोटू वसावा की भारतीय ट्राइबल पार्टी को दो सीटें मिलीं थी और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। 2022 के गुजरात चुनावों में भाजपा ने आदिवासी मतदाताओं को खुश करने के लिए आदिवासी इलाकों में आयोजित ‘मोदी मैजिक’ और उसकी ‘गौरव यात्रा’ को गिनाया है।

पूर्वोत्तर गुजरात में जीत की कुंजी आदिवासी बेल्ट के पास है, जो भारत की एसटी आबादी का 8.1 प्रतिशत है। 2011 की जनगणना के अनुसार, गुजरात में जनजातीय आबादी 89.17 लाख थी, जो इसकी कुल आबादी का लगभग 15 प्रतिशत है। यह बड़े पैमाने पर राज्य के 14 पूर्वी जिलों में फैली हुई है और 48 तालुकों में केंद्रित है। गुजरात में इस बार आदिवासी समुदाय में मोदी मैजिक चल गया है।

कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी AAP?

गुजरात की राजनीति की जानकारी रखने वाले राजनीतिक जानकारों की माने तो, ‘कांग्रेस की हार की एक सबसे बड़ी वजह यह है कि अधिक पार्टियां मैदान में थीं, खासकर आम आदमी पार्टी (आप) जिसने कांग्रेस के वोट को प्रभावित किया और भाजपा को फायदा पहुंचाया। कई आदिवासी सीटों पर आप उम्मीदवारों ने कांग्रेस का वोट छीनकर भाजपा को फायदा पहुंचाया है। साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में, प्रमुख स्थानीय आदिवासी कांग्रेस नेता भाजपा में आये हैं।

भाजपा को आदिवासी बहुल इलाकों में मिला रिकॉर्ड तोड़ वोट

आदिवासियों में बीते कुछ दशकों के दौरान वोट को लेकर और सरकार को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इस बार चुनाव में दक्षिण गुजरात के आदिवासी बहुल सीटों पर मतदान 65 से 74% के बीच रहा। नतीजों से समझ आ रहा है कि व्यारा, निजार, डांग, देदियापाड़ा और झगड़िया के प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने कांग्रेस और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) को खारिज कर दिया है। पार-तापी-नर्मदा नदी जोड़ने वाली परियोजनाओं, बेरोजगारी, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (एसओयू) परियोजना में आदिवासियों की मूल्यवान भूमि पार्सल खोने जैसे मसलों के बाद भाजपा को घाटा नहीं झेलना पड़ा।

कांग्रेस के जी का जंजाल बने उसके ही नेता

2017 के चुनाव में कांग्रेस ने गुजरात में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन तब उसके पास जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे गुजरात की राजनीति के बड़े नेता थे। इस बार कांग्रेस के गढ़ व्यारा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा विधायक पुनाजी गामित, जो लगातार चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं, भाजपा के मोहन कोंकणी से हार गए। 2017 में, पुनाजी गामित ने 24,414 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। वहीं, तापी जिले के निजार विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुनील गामित भाजपा के डॉ. जयराम गामित से हार गए। 2017 में, सुनील गामित ने 23,000 मतों के अंतर से जीत के अंतर से निजार का रण जीता था। इस बार गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो जीत हासिल की है वह ऐतिहासिक है और आम आदमी पार्टी के दावे फेल होते हुए दिखाई दिए हैं।

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