June 4, 2026

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India-China Tension: चीन को मात देने के लिए इस मेगा प्रोजेक्ट पर काम होने जा रहा शुरू, पलक झपकते ही सेना और हथियार पहुंचाएगा भारत

नई दिल्ली। चीन से निपटने के लिए भारत लगातार सीमा के पास सड़क, पुल और अन्य साधन लगातार बना रहा है। अब मोदी सरकार ने चीन के किसी भी दुस्साहस को जवाब देने के लिए मेगा प्लान तैयार किया है। इस योजना के पूरा होने पर अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी पर चीन के खिलाफ सेना को और तेजी से तैनात किया जा सकेगा। योजना के तहत एक नेशनल हाइवे को मंजूरी दी गई है। ये फ्रंटियर हाइवे कहलाएगा और साल 2026 तक बनकर तैयार होगा। बता दें कि चीन 97 लाख 6 हजार 961 वर्ग किलोमीटर में है। एशिया का ये सबसे बड़ा देश है। चीन ने 43 फीसदी के करीब जमीन हड़पी हुई है। वो भारत के पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश पर भी लगातार दावा करता है। बीती 9 दिसंबर को अरुणाचल के तवांग में चीन और भारत की सेना के बीच जमकर झड़प हुई थी। भारत के वीर जवानों ने चीन के सैनिकों को घुसपैठ से रोका था और पीटकर खदेड़ दिया था।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिस नए फ्रंटियर हाइवे को मंजूरी मिली है, वो 1748 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 27000 करोड़ की लागत लगेगी। नितिन गडकरी का रोड ट्रांसपोर्ट मंत्रालय इसे बनाएगा। बोमडिला से शुरू होने वाला फ्रंटियर हाइवे नाफ्रा, हुरी और मॉनीगोंग से गुजरेगा। ये सभी एलएसी से करीब हैं। हाइवे से एलएसी की तरफ जाने वाली सड़कों को भी जोड़ा जाएगा। चीन के पास जिडो और चेनक्वेंटी के भी ये पास होगा। फ्रंटियर हाइवे म्यांमार की सीमा के पास स्थित विजयनगर तक पहुंचेगा। अलग-अलग पैकेज के तहत जल्दी ही इस हाइवे पर काम शुरू होने वाला है। हाइवे के कुल पैकेज यानी हिस्सों की संख्या 9 बताई जा रही है।

जिन इलाकों से ये फ्रंटियर हाइवे गुजरेगा, वहां कई जगह अभी कोई सड़क नहीं है। पुल और सुरंगों वाला ये हाइवे दो लेन का होगा। फ्रंटियर हाइवे से सेना को एलएसी तक पहुंचाना तो आसान होगा ही, साथ ही अरुणाचल के तमाम हिस्सों के विकास में भी इसका बड़ा योगदान होगा। वहां के लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।

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