May 2, 2026

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रामायण की प्रतियां जलाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, आरोपियों के खिलाफ एडवाइजरी बोर्ड ने भी रासुका लगाने को दी मंजूरी

नई दिल्ली। बीते दिनों रामायण को लेकर मुख्तलिफ सियासी दलों के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया था। इसकी शुरुआत सबसे पहले राजद नेता व बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर प्रसाद ने रामायण में लिखे एक श्लोक को आपत्तिजनक बताकर की थी। जिसके बाद बीजेपी ने उनसे इस्तीफा भी मांगा और माफी भी। लेकिन ना ही मंत्री ने माफी मांगी और ना ही इस्तीफा दिया। वहीं बिहार के बाद रामायण को लेकर जारी वाकयुद्ध उत्तर प्रदेश पहुंचा। जहां सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर विवादास्पद टिप्पणी कर दी। उन्होंने इस पुस्तक को विवादास्पद बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी। जिसके बाद बीजेपी उन पर हमलावर हो गई।

बीजेपी ने सपा से स्वामी प्रसाद मौर्य को बर्खास्त करने की मांग की, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि इसके विपरीत सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महासचिव पद का प्रभार सौंप दिया। जिसके बाद बीजेपी ने निशाना भी साधा था। हालांकि, समाज के एक तबके के बीच लगातार स्वामी के खिलाफ रोष देखने को मिला। इतना ही नहीं, सियासी मोर्चे पर रामायण को लेकर हुई बहस के बाद कुछ लोगों ने अपनी सारी हदें पार करते हुए सरेआम रामायण की प्रतियां जल दीं। बाद में इस कुकृत्य में संलिप्त सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

वहीं, अब खबर है कि लखनऊ में रामचरितमानस फाड़ने व जलाने वालों पर एडवाइजरी बोर्ड ने भी रासुका लगाने के लिए मंजूरी दी है। ऐसे में अतिशीघ्र इन आरोपियों के खिलाफ रासुका लगाया जाएगा। अगर ऐसा हुआ, तो आरोपियों की मुश्किलें बढ़ेगी।

बहरहाल, अब रामायण की प्रतियां जलाने वाले आरोपियों के खिलाफ क्या कुछ कार्रवाई की जाती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। आपको बता दे कि रामायण की प्रतियां जलाने के प्रकरण में सीएम योगी ने भी एक इंटरव्यू के दौरान बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग आज रामायण के बारे में अनाप शनाप बोल रहे हैं। उन्हें रामायण के बारे में कोई जानकारी नहीं है।  पहले वे जाकर रामायण को पढ़ें।

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