May 1, 2026

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर ने कॉलेजियम सिस्टम पर उठाए सवाल, जजों को भी बताया अयोग्य और आलसी

तिरुवनंतपुरम। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने जजों की नियुक्ति संबंधी कॉलेजियम पद्धति को संवैधानिक और सही बताया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पद से रिटायर होने वाले जस्ती चेलमेश्वर ने कॉलेजियम पद्धति पर सवाल खड़े किए हैं। केरल हाईकोर्ट में एक कार्यक्रम में शामिल हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कॉलेजियम के पारदर्शी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि कई जज काम के मामले में अयोग्य हैं और आलस की वजह से वक्त पर फैसला भी नहीं लिखते हैं। रिटायर्ड जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि कॉलेजियम के सामने कुछ आरोप आते हैं, लेकिन आमतौर पर उनके बारे में कोई निर्णय या कदम नहीं उठाया जाता। आम समाधान जज का ट्रांसफर कर देना होता है।

रिटायर्ड जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर ने ये भी आशंका जताई कि कॉलेजियम के बारे में ये राय रखने पर उनकी आलोचना भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कल ये कहकर ट्रोल किया जाऊंगा कि रिटायर होने के बाद ये सब बातें क्यों कह रहा है। उन्होंने इसे भाग्य बताया। जस्टिस चेलमेश्वर ने ये भी कहा कि न्यायपालिका आजाद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर सोचिए कि एक पुलिसकर्मी क्या कर सकता है। वे बुरे नहीं होते, लेकिन उनके पास ताकत है। जस्टिस चेलमेश्वर ने केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के बारे में कहा कि उन्होंने 42वें संविधान संशोधन के बारे में बयान दिया। इस तरह की मर्दानगी सभी के लिए खराब है। कोई भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है कि लोगों को प्रभावित करने वाली व्यवस्था में किस तरह सुधार लाया जाए।

जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे दीपक मिश्रा के कामकाज पर सवाल उठाने वाले कुछ जजों का साथ भी पहले दिया था। उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ मिलकर सीबीआई के जज रहे बीएच लोया की रहस्यमय मौत के मामले में सवाल खड़े किए थे। साथ ही चारों जजों ने केस दिए जाने या न दिए जाने के तत्कालीन चीफ जस्टिस के तरीके पर भी सवाल खड़े किए थे। जस्टिस चेलमेश्वर की तरफ से कॉलेजियम के बारे में रखी गई ताजा राय इसलिए अहम है क्योंकि वो सुप्रीम कोर्ट के जज रहते वक्त कॉलेजियम में शामिल थे।

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