May 2, 2026

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आतंकवाद को लेकर एस जयशंकर ने दिखाया पाकिस्तान को आईना, तो तिलमिलाए बिलावल भुट्टो

नई दिल्ली। बीते दिनों पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने जैसे ही शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने का ऐलान किया, तो कई मसलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गुलजार हो गया, जिसमें सबसे प्रमुख विषय रहा आतंकवाद। निसंदेह दोनों देशों के बीच रिश्तों के तनावग्रस्त होने की वजह कुछ और नहीं सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद ही है, जिसका खामियाजा सामरिक मोर्चे पर कुल मिलाकर दोनों ही देशों को भुगतना पड़ता है।

हालांकि, अपनी आतंक परस्त नीतियों की वजह से पाकिस्तान को भारत से कई मर्तबा मुंह की खानी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद भी उसकी फितरत में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं आ रहा है। पुलवामा से लेकर उरी तक ऐसी कई मिसालें हैं, जो इस बात की खुलकर तस्दीक करतीं हैं कि पाकिस्तान को भारत से भिड़ने की भारी कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद भी पाकिस्तान की हिमाकत देखिए कि उसे अपनी गुस्ताखी पर ज़रा भी हया नहीं है।

बहरहाल, इस बीच जैसे ही ऐलान हुआ कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो शंघाई सहयोग संगठन में शिरकत करने के लिए भारत आने वाले हैं, तो लोगों के जेहन में बेशुमार सवाल आए। गोवा में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन में शिरकत करने पाकिस्तानी विदेश मंत्री अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचे, तो विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करने से गुरेज नहीं किया। दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया। इसके अलावा साथ में रात्रि भोज किया। इस बीच दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। लेकिन, इस बीच विदेश एस जयशंकर ने अपना राजधर्म निभाने से भी गुरेज नहीं किया।

आपको बता दें कि भारतीय विदेश मंत्री ने इस बीच आतंकवाद के मसले को लेकर पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की और बिलावल की मौजूदगी में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को इस बात का एहसास दिला दिया कि जब तक दोनों देशों के बीच आतंकवाद के मसले का समाधान नहीं हो जाता है, तब तक रिश्तों में किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है। आइए, आगे जानते हैं कि आखिर विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में क्या कुछ कहा है।

विदेश मंत्री के संबोधन की मुख्य बातें

बता दें कि केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कुछ लोग मानवाधिकार की आड़ लेकर आतंकवाद को जायज ठहराने की कोशिश करते हैं, लेकिन आतंकवाद को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में मिठास लाने के लिए आतंकवाद के हर स्वरूपों पर हमला बोलना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद की आर्थिक कमर भी तोड़नी होगी। तभी घाटी में शांतिपूर्ण स्थिति पैदा होगी। वहीं, जैसे ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बिलावल को उनके मुल्क की गुस्ताखी का एहसास कराया, तो फिर वो अपनी तरफ से तकरीरें देने के लिए खड़े हुए। आइए, जानते हैं कि उन्होंने क्या कछ कहा।

जानें, बिलावल ने क्या कहा

पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन में मेरी मौजूदगी इस बात का प्रतीक है कि यह संगठन हमारे लिए कितना अहम है। उन्होंने दो दूक कह दिया कि दोनों ही देशों संगठन के सिद्धांतों का पालन करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हम किसी भी दायरे में जाकर इस संगठन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। पाकिस्तानी विदेशी मंत्री ने कहा कि एशियाई देशों के बीच अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए शंघाई सहयोग संगठन एक उपयुक्त मंच हो सकता है।

गरीबी उन्मूलन पर भी बोले विदेश मंत्री

वहीं, ऐसे आलम में जब पाकिस्तान दो जून की रोटी के लिए मुहाल है, तो ऐसी सूरत में अपने संबोधन में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने गरीबी उन्मूलन पर भी अपनी राय साझा की है, जिसमें उन्होंने कहा कि हमें गरीबी उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्ध होकर काम करना होगा। उन्होंने इस वैश्विक मंच से यह भी कहने से गुरेज नहीं किया कि वर्तमान में पाकिस्तान गहरी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, जिसने निपटने के लिए हमें अन्य देशों की सहयोग की जरूरत है, तो ऐसा कहकर बिलावल ने यह कहने से तनिक भी गुरेज नहीं किया कि उनका देश इस समय भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हालांकि, बिलावल के इन शब्दों पर किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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