May 17, 2026

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‘समान नागरिक संहिता से भाईचारा नहीं बढ़ेगा’, पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया यूसीसी का विरोध

कानपुर। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की मुखालिफत की है। एआईएमपीएलबी के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता की कोई जरूरत नहीं है। रहमानी ने कानपुर में मीडिया से बात करते हुए संविधान के तमाम अनुच्छेद गिनाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के अलावा ईसाई और पारसियों के भी अपने सिविल कोड हैं। रहमानी ने ये भी कहा कि सोच बदलने की जरूरत है। वरना ईरान और इराक 10 साल तक जंग लड़ते रहे। उनके पास कोई समान नागरिक संहिता नहीं थी। रहमानी ने कहा कि इन सबसे भाईचारा नहीं बढ़ने वाला है।

बता दें कि शनिवार को ऐसी खबरें आई थीं कि केंद्र सरकार संसद के मॉनसून सत्र में समान नागरिक संहिता संबंधी बिल ला सकती है। यूसीसी के बिल के तौर-तरीकों को विधि आयोग ने न्याय विभाग को सौंपा है। इसके तहत सभी धर्मों के मूल तत्वों का सम्मान करते हुए यूसीसी का बिल तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इस बिल के पास होने के बाद शादी, तलाक और उत्तराधिकार संबंधी मामले सभी समुदायों के लिए एक जैसे होंगे। एआईएमपीएलबी इसी का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि यूसीसी उसके पर्सनल लॉ में दखल देने का मामला है।

अभी देश में सिर्फ गोवा में यूसीसी लागू है। गोवा पर पुर्तगाल के शासन के दौरान यूसीसी लागू किया गया था। वहीं, उत्तराखंड और गुजरात सरकार ने यूसीसी पास कराने के लिए कमेटी का गठन किया था। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बीते दिनों कहा था कि कमेटी ने अपना सुझाव दे दिया है। जल्दी ही उत्तराखंड विधानसभा में यूसीसी का बिल पास कराया जाएगा। यूसीसी लागू करने की बात भारत के संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में भी है। इसमें कहा गया है कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में सरकार कदम उठाएगी। सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में यूसीसी लाने के लिए केंद्र सरकार को कह चुका है।

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