Review: ‘जन्नत नहीं दोजख में मिलेगी जगह…’, अभिशाप में बदलते भरोसे की दास्तान है ’72 हूरें’
नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद आज फाइनली फिल्म ’72 हूरें’ रिलीज की जा चुकी है। ये फिल्म अपने अनाउंसमेंट के बाद से ही चर्चा में बनी हुई है। अब जब फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है तो लोगों के रिएक्शंस आने भी शुरू हो गए हैं। फिल्म ’72 हूरें’ संजय पूरन सिंह चौहान के निर्देशन में बनी है। इस फिल्म के जरिए समाज को ये बताने की कोशिश की गई है कि ‘कैसे आपका लोगों पर विश्वाश अभिशाप में बदल सकता है।’ फिल्म देखने के बाद कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर अपने रिएक्शंस शेयर किए हैं।
एक यूजर ने ’72 हूरें’ देखने बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- ‘एक ऐसी कहानी, जो भावनात्मक रूप से सक्षम है और सिनेमा की ताकत को दर्शाती है। इस असाधारण राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संजय पूरन सिंह चौहान की फिल्म को देखने से ना चूकें।’
फिल्म क्रिटिक जोगिंदर टुटेजा ने फिल्म ’72 हूरें’ के लिए लिखा- ’72 हूरें’ फिल्म विचारों को हिलाकर रख देने वाली फिल्म है। ये फिल्म मौत के बाद जीवन की कहानी को बयां करती है। अपराध करने के बाद भी जन्नत मिलने वाली धारणाओं को ख़ारिज करती है…’
