जी-20 सम्मेलन में PM मोदी ने विश्व को दिया सबका साथ…सबका विकास का मंत्र, अपने संबोधन में इन मुद्दों पर खुलकर रखी अपनी बात
नई दिल्ली। भारत की अध्य़क्षता में दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें कई राष्ट्रप्रमुखों ने हिस्सा लिया है। भारत, चीन, रूस, सऊदी अरब सहित अन्य देशों के प्रमुख ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कई विषयों का प्रमुखता से उल्लेख किया, जिसमें मोरक्को में आए भूकंप, कोरोना काल की त्रासदी, कोरोना के बाद वैश्विक परिदृश में आए परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, विदेश नीति, घरेलू नीति सहित अन्य मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे विश्व की निगाहें टिकी हुई हैं, चूंकि यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि यह सम्मेलन विश्व की सर्वाधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इसकी प्रासंगिकता और अहमियत में इजाफा होना लाजिमी है। आइए, आगे का रिपोर्ट में हम आपको विस्तार से बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी -20 सम्मेलन में क्या कुछ कहा है?
प्रधानमंत्री का संबोधन
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि, ‘इससे पहले कि हम जी20 की कार्यवाही शुरू करें, मैं मोरक्को में भूकंप के कारण हुई जानमाल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं। हम प्रार्थना करते हैं कि सभी घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। भारत इस कठिन समय में मोरक्को को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।”
पीएम मोेदी ने आगे कहा कि, ”शिखर सम्मेलन का पहला सत्र शुरू होने पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में अफ्रीकी संघ के प्रमुख को अपनी सीट लेने के लिए आमंत्रित किया।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि, ‘कोमोरोस संघ के अध्यक्ष और अफ्रीकी संघ (एयू) के अध्यक्ष, अज़ाली असौमानी ने संघ के G20 का स्थायी सदस्य बनने पर अपना स्थान ग्रहण किया।
आज, जी 20 के अध्यक्ष के रूप में, भारत दुनिया से वैश्विक विश्वास की कमी को विश्वास और निर्भरता में बदलने का आह्वान करता है। यह समय हम सभी को एक साथ मिलकर चलने का है।’ इस समय में ‘सबका’ का मंत्र है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि,’”21वीं सदी दुनिया को नई दिशा दिखाने का एक महत्वपूर्ण समय है। यही वह समय है जब पुरानी समस्याएं हमसे नया समाधान मांग रही हैं और इसीलिए हमें मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए आगे बढ़ना चाहिए…यदि हम कोविड-19 को हरा सकते हैं, हम युद्ध के कारण उत्पन्न विश्वास की कमी पर भी विजय पा सकते हैं”
