June 28, 2026

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‘सबूतों की जांच कराएंगे, लेकिन ऐसी घटनाओं से अमेरिका-भारत रिश्ते नहीं बिगड़ेंगे’, खालिस्तानी पन्नू की हत्या की साजिश पर पहली बार बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि भारत के एक अफसर ने खालिस्तानी आतंकी और सिख्स फॉर जस्टिस यानी एसएफजे के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची। इस पर पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में अपनी राय जाहिर की है। मोदी ने ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा है कि वो इस मामले में हर सबूत पर गौर करेंगे, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि ऐसी कुछ घटनाओं से भारत और अमेरिका के संबंध खराब नहीं होंगे। मोदी ने अखबार से कहा कि अगर कोई इस बारे में सबूत देता है कि हमारे किसी नागरिक ने कुछ अच्छा या खराब किया है, तो हम उस पर गौर करने के लिए तैयार हैं। मोदी ने कहा कि हम कानून के राज पर भरोसा करते हैं। भारत ने 2020 में गुरपतवंत सिंह पन्नू को आतंकी घोषित किया था। भारत लगातार पश्चिम देशों से कहता रहा है कि उसकी सुरक्षा और सिख अलगाववाद के बारे में वो कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि विदेश में कई आतंकी संगठनों की हरकतों से वो काफी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में हिंसा भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को बेहतर बनाए रखने की बात सभी पक्ष कहते हैं। इससे साफ है कि हमारी दोस्ती मजबूत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंधों में आतंकवाद पर सहयोग बहुत अहम है। मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में ऐसी कुछ घटनाओं से कोई असर पड़ने वाला नहीं है। बता दें कि इसी साल जून में मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन सितंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली आए थे। दोनों नेताओं ने रक्षा से लेकर उच्च तकनीकी के क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया था।

गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश के मामले में भारत का विदेश मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि उसने उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर जांच शुरू की है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस आरोप को भारत ने गंभीरता से लिया है। इससे पहले कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाया था कि उसकी एजेंसियों ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कराई। भारत ने इस मामले में कनाडा से सबूत मांगे थे, लेकिन अब तक कनाडा ने कोई सबूत नहीं दिया है।