May 31, 2026

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75 साल बाद महिलाओं के लिए भारतीय सेना में प्रवेश के खुले दरवाजे

नई दिल्ली। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने महिला के पक्ष में एक फैसला लिया था। कोर्ट ने महिला अफसरों को भारतीय सेना और नौसेना में स्थाई कमीशन की मांग को लेकर दायर याचिक पर फैसला सुनाते हुए सेना को ये निर्देश दिया था कि वो एक महीने के अंदर महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन देने पर विचार करे और नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए 2 महीने के भीतर इन्हें स्थायी कमीशन दे। तो वहीं अब एक बार फिर महिला सशक्तिकरण के पथ पर आगे बढ़ते हुए कोर्ट मे एक और बड़ा फैसला लेते हुए लड़कियों को NDA एग्जाम में बैठने की इजाजत दे दी है।

सरकार के फैसले के बाद भी सैनिक स्कूल और इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) में लड़कियों को दाखिला नहीं दिए जाने मामले पर जारी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये फैसला लिया कि अब कियों को NDA एग्जाम में बैठने की इजाजत होगी। बता दें इसकी परिक्षा 8 सितंबर को आयोजित की जानी है।

हालांकि बीते साल से ही सैनिक स्कूलों ने लड़कियों को प्रायोगिक तौर पर लेना शुरू कर दिया था। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने भी लाल किले से इसे लेकर घोषणा की थी कि लड़कियों को सैनिक स्कूलों में भर्ती की जाएगी। हालांकि अभी तक इंडियन मिलेट्री कॉलेज में लड़कियों को दाखिला मिलना संभव नहीं हो पा रहा है। सेना की ओर से ये कहा गया है कि लड़के और लड़कियों के लिए ट्रेनिंग अलग-अलग हैं। अभी तक सेना के लड़ाकू बलों में महिलाओं को भर्ती नहीं किया गया है। महिलाओं को केवल 10 गैर-लड़ाकू स्ट्रीम में चुना जाता है।

सीनियर एडवोकेट ऐश्वर्या भाटी ने RIMC में लड़कियों को एडमिशन न देने का तर्क देते हुए कोर्ट में कहा, “फिलहाल हम लड़कियों को RIMC में लेने की स्थिति में नहीं हैं. यह 100 साल पुराना स्कूल है. RIMC के छात्रों के लिए NDA की परीक्षा देना अनिवार्य होता है. उनका अलग बोर्ड है. यह NDA का फीडर कैडर है और NDA में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे से जुड़ा है.”

इस पर जस्टिस कौल ने कहा, “आप कहते हैं कि RIMC 100 साल पुराना है, तो आप 100 साल के लैंगिक भेदभाव का समर्थन कर रहे हैं? हमने पहले ही अंतरिम आदेश के जरिए लड़कियों को एनडीए में प्रवेश की अनुमति दे दी है.” कौल की बात पर जवाब देते हुए भाटी ने कहा कि RIMC के छात्रों को अनिवार्य रूप से NDA में शामिल होना है। वे 8वीं के छात्रों को भर्ती देते हैं उन्हें खास रूप से ट्रेनिंग दी जाती है। ऐसे में अगर लड़कियों को इसमें शामिल होना है तो उन्हें पूरी तरह से स्कूली शिक्षा का त्याग करना होगा।

NDA, सैनिक स्कूलों, RIMC में महिलाओं की भर्ती न देने की सोच पर सेना को कोर्ट ने उन्हें फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा, “आप इस मामले पर न्यायपालिका को आदेश देने के लिए बाध्य कर रहे हैं. यह बेहतर है कि आप (सेना) खुद इसके लिए दिश‍ानिर्देश तैयार करें. हम उन लड़कियों को NDA की परीक्षा में बैठने की अनुमति दे रहे हैं जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.” आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों को NDA की परीक्षा देने की इजाजत दे दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब लड़कियों के NDA में भर्ती के मामले पर विस्तृत नीति बनाने के लिए 05 सितंबर को विचार किया जाएगा।

 

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