April 22, 2026

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क्या है सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट, जिसको लेकर मांग पर अड़े हैं डॉक्टर्स, स्वास्थ्य मंत्रालय मगर नहीं हो रहा तैयार?

नई दिल्ली। कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में एक  ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ अस्पताल में हुई भयावह रेप और मर्डर की घटना के बाद से डॉक्टरों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा है। डॉक्टरों ने सरकार से ‘सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट’ यानी केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम की मांग की है। उनका मानना है कि इसी अधिनियम के तहत अस्पतालों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इस संबंध में उन्होंने सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी है। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों की इस मांग पर अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए हैं। देश के कोने-कोने से डॉक्टरों के संगठनों ने इस कानून की मांग की है। सरकार की तरफ से इस मांग को अनदेखा किए जाने के कारण आंदोलन भी तेज होता जा रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट क्या है और इसकी मांग क्यों की जा रही है। साथ ही यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि स्वास्थ्य मंत्रालय किन कारणों से डॉक्टरों की मांगों को स्वीकार करने से कतरा रहा है।

सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट क्या है?

‘प्रीवेंशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एंड क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट बिल, 2022’ को ‘सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट फॉर डॉक्टर्स’ के नाम से जाना जाता है। इस बिल को 2022 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को परिभाषित करना और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान करना है। इस बिल में हिंसा रोकने, दंडित करने, हिंसा की रिपोर्ट करने, लोगों को जागरूक करने और शिकायतों का समाधान करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इस प्रस्तावित बिल के तहत जिन स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा प्रदान की जानी है, उनमें चिकित्सा प्रैक्टिशनर, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डेंटिस्ट, नर्सिंग प्रोफेशनल्स, मेडिकल और नर्सिंग छात्र, स्वास्थ्यकर्मी और अस्पताल के सहायक कर्मचारी शामिल हैं। यह बिल 2022 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसे आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया, क्योंकि इसके कई उद्देश्य महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 में पहले से ही शामिल थे।

सरकार क्यों कर रही है सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट का विरोध?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के आधार पर केंद्रीय कानून बनाने से बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होगा। आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ही एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया था। सूत्रों ने कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत ही इस तरह के अपराधों से निपटा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक और केरल सहित 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए कानून पारित किया है। इन सभी राज्यों में इस प्रकार के अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती माने जाते हैं। हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का कहना है कि इन कानूनों के बावजूद डॉक्टरों पर होने वाले हमलों में कोई कमी नहीं आई है। एक सरकारी सूत्र ने कहा, “आरजी कर की घटना के आधार पर एक अध्यादेश या केंद्रीय कानून लाने से बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। आरजी कर की घटना मरीज और डॉक्टर के बीच हिंसा का मामला नहीं था।” उन्होंने आगे कहा, “अस्पतालों को सार्वजनिक सुविधा होने के नाते किले में नहीं बदला जा सकता। हमने डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की है, क्योंकि इससे मरीजों की देखभाल बाधित हो रही है।”